यमन सरकार का बड़ा एक्शन: हुथी विद्रोहियों को खदेड़ने के लिए 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' शुरू

Nura Basta6 October 20262 min read0 viewsYemen
यमन सरकार का बड़ा एक्शन: हुथी विद्रोहियों को खदेड़ने के लिए 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' शुरू

यमन में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार, जिसका नेतृत्व राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (PLC) के रशद अल-अलीमी कर रहे हैं, ने हुथी विद्रोहियों के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है। इस अभियान को 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' का नाम दिया गया है। यह हमला सितंबर महीने में हुथियों द्वारा की गई बढ़त के जवाब में एक जवाबी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य खोए हुए क्षेत्रों को वापस पाना और सरकारी संस्थानों को फिर से स्थापित करना है।

सरकारी बलों, जिनमें 'सदर्न जायंट्स ब्रिगेड्स' और 'नेशनल शील्ड फोर्सेज' शामिल हैं, ने लाल सागर के तट पर महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल की हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बलों ने रणनीतिक बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य और मोखा पोर्ट सिटी के पास के इलाकों पर फिर से कब्जा कर लिया है। इसके अलावा, थुबाब को सुरक्षित करने और धुबाब हवाई अड्डे पर नियंत्रण पाने के साथ-साथ धुबाब और मोखा के बीच के महत्वपूर्ण सप्लाई रोड को भी काट दिया गया है। मारिब गवर्नरेट के रघवान क्षेत्र और अल-जौफ में भी भीषण लड़ाई जारी है, जबकि ताइज शहर अभी भी दोनों पक्षों के बीच संघर्ष का केंद्र बना हुआ है।

सऊदी अरब का समर्थन और अंतरराष्ट्रीय समीकरण

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इस सैन्य अभियान के जवाब में हुथियों ने सऊदी अरब की सीमा पर हमले किए हैं और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। हालांकि, सऊदी अरब ने इस स्थिति में यमनी सरकार का पूरा साथ देने का वादा किया है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अध्यक्षता में सऊदी कैबिनेट ने हुथी मिलिशिया के 'तख्तापलट' को खत्म करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। सऊदी अरब ने करीब 100 लड़ाकू विमानों के जरिए 320 से अधिक हवाई हमले किए हैं।

इस बीच, एक नए 'मक्का समझौते' के तहत सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करने के लिए तेजी से सैन्य क्षमताएं तैनात करने पर सहमति जताई है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां भी गठबंधन के हवाई अभियानों में सहायता प्रदान कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2022 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा कराया गया युद्धविराम अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।

सैन्य प्रवक्ता मेजर जनरल माजेद अब्दुल्ला अल-नुजाइली का दावा है कि इस ऑपरेशन में हुथी बलों को भारी जनहानि और हथियारों का नुकसान हुआ है। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि केवल क्षेत्रीय जीत काफी नहीं होगी; असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यमन सरकार सैन्य दबाव को एक एकीकृत राजनीतिक सत्ता में कैसे बदलती है। विशेष रूप से बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि हुथियों का इस क्षेत्र पर कब्जा वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

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