ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन: सऊदी गठबंधन ने उतारे 100 लड़ाकू विमान, हूतियों पर भीषण हमला

यमन में सरकारी नियंत्रण वापस पाने के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने एक बड़ा सैन्य अभियान 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' शुरू किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राजधानी सना को हूती विद्रोहियों के कब्जे से मुक्त कराना और राज्य संस्थानों को वापस पाना है। यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के अध्यक्ष रशाद अल-अलीमी की घोषणा के बाद 5 अक्टूबर, 2026 को इस बड़े हमले का आगाज हुआ।
गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने पुष्टि की है कि हूती ठिकानों को तबाह करने और सरकारी बलों को हवाई सुरक्षा देने के लिए 100 लड़ाकू विमान तैनात किए गए हैं, जो चौबीसों घंटे निगरानी और हमले कर रहे हैं। अब तक इस ऑपरेशन के तहत 324 उच्च-मूल्य वाले हूती ठिकानों को पूरी तरह नष्ट किया जा चुका है। इसके अलावा, नौसेना ने होडेइडा के पास हथियारों के डिपो और समुद्री सुरंगों को नष्ट कर लाल सागर के दक्षिणी हिस्से में एक बड़े हमले को नाकाम कर दिया है और रणनीतिक बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को सुरक्षित कर लिया है।
जमीनी मोर्चे पर बड़ी कामयाबी और जवाबी हमले
जमीनी स्तर पर भी सरकारी बलों को बड़ी सफलता मिली है। 'सदर्न जायंट्स ब्रिगेड' और 'नेशन शील्ड' बलों ने धुबाब शहर और वहां के हवाई अड्डे पर फिर से कब्जा कर लिया है। ताइज एक्सिस मीडिया सेंटर के अनुसार, इस संघर्ष में करीब 100 हूती लड़ाके मारे गए और 150 घायल हुए हैं। साथ ही पांच ड्रोन, छह वाहनों और एक टैंक को नष्ट किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, धुबाब जिले में सैकड़ों हूती लड़ाकों को घेर लिया गया है।
दूसरी ओर, हूतियों ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। उन्होंने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और सऊदी अरामको रिफाइनरी सहित कई ठिकानों पर हमले किए हैं। इस तनाव के बीच अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने सऊदी अरब के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया है।
इस सैन्य टकराव के मानवीय परिणाम काफी गंभीर हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इस तेजी से बढ़ती हिंसा पर गहरी चिंता जताई है, क्योंकि पिछले कुछ हफ्तों में ही 1.84 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। सुरक्षा के लिहाज से पाकिस्तान और तुर्की ने भी सऊदी अरब के साथ अपनी रक्षा प्रतिबद्धताओं को सक्रिय कर दिया है।