ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन: 100 लड़ाकू विमानों के साथ सऊदी गठबंधन का बड़ा हमला

Nura Basta6 October 20262 min read0 viewsYemen
ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन: 100 लड़ाकू विमानों के साथ सऊदी गठबंधन का बड़ा हमला

यमन में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' (Operation Dawn of Yemen) की शुरुआत कर दी है। इस बड़े सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों और सरकारी संस्थानों को वापस आजाद कराना है। गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की के अनुसार, इस मिशन में 100 लड़ाकू विमानों को तैनात किया गया है।

इस हवाई हमले की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गठबंधन ने अब तक 324 हाई-वैल्यू टारगेट को पूरी तरह तबाह कर दिया है। साथ ही, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य (Bab el-Mandeb Strait) को हवाई सुरक्षा प्रदान की जा रही है। यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन रशाद अल-अलीमी ने साफ किया है कि इस ऑपरेशन का लक्ष्य राजधानी सना को मुक्त कराना और राज्य संस्थानों को फिर से बहाल करना है ताकि हूती मिलिशिया का नियंत्रण खत्म हो सके।

जमीनी कार्रवाई और हूतियों का पलटवार

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हवाई हमलों के साथ-साथ जमीन पर भी बड़ी कामयाबी मिली है। यमनी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल माजिद अब्दुल्ला अल-नुजायली ने पुष्टि की है कि सरकारी बलों ने धुबाब शहर और वहां के हवाई अड्डे पर दोबारा कब्जा कर लिया है। इसके अलावा, धुबाब से मोखा को जोड़ने वाले रास्ते को भी काट दिया गया है। यह कार्रवाई सितंबर में हूतियों द्वारा मोखा और लाल सागर के कई द्वीपों पर कब्जे के जवाब में की गई है। चार साल के युद्धविराम के बाद यह एक बड़ा सैन्य बदलाव माना जा रहा है।

दूसरी ओर, हूती विद्रोहियों ने भी इस हमले का जवाब देने का दावा किया है। उन्होंने सऊदी अरब के रियाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, अरामको रिफाइनरी और अन्य सैन्य व आर्थिक ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन्स से हमला किया है।

इस हिंसा का असर आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है। सना स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, 3 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच हुई झड़पों में 197 लोग मारे गए या घायल हुए हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि उन्हें हूतियों की ओर से जवाबी कार्रवाई की उम्मीद थी, क्योंकि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच खुफिया जानकारी साझा करने और रणनीतिक योजना बनाने का समझौता है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने इस बढ़ती हिंसा और सीमा पार हमलों पर गहरी चिंता जताते हुए इसकी निंदा की है।

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