सऊदी गठबंधन का बड़ा एक्शन: 100 लड़ाकू विमानों के साथ 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' शुरू

यमन में सरकार की सत्ता बहाल करने के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने एक बेहद आक्रामक सैन्य अभियान छेड़ दिया है। ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन के तहत गठबंधन ने एक साथ 100 लड़ाकू विमानों को तैनात किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य हूथी विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों और सरकारी संस्थानों को वापस पाना है। इस बड़े हमले का अंतिम लक्ष्य यमन की राजधानी सना को पूरी तरह मुक्त कराना है।
गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान अब तक 324 हाई-वैल्यू टारगेट को तबाह किया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जमीनी सेनाओं को चौबीसों घंटे हवाई सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अलावा, लाल सागर के महत्वपूर्ण जलमार्गों की सुरक्षा के लिए बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को हवाई सुरक्षा दी जा रही है और होदैदा में हूथी सैन्य ठिकानों को नष्ट किया गया है ताकि समुद्री व्यापार प्रभावित न हो।
जमीनी बढ़त और अंतरराष्ट्रीय समर्थन
यमन के राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष रशाद अल-अलीमी ने पुष्टि की कि यह अभियान 5 अक्टूबर, 2026 को शुरू हुआ। सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल माजिद अब्दुल्ला अल-नुज़यली के अनुसार, सरकारी बलों और 'सदर्न जायंट्स ब्रिगेड' ने बाब अल-मंडेब क्षेत्र और धुबाब हवाई अड्डे पर नियंत्रण कर लिया है, जिससे धुबाब और मोखा के बीच का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। सेना का दावा है कि 1,122 सटीक हमलों में 1,747 हूथी लड़ाके मारे गए हैं। जॉइंट ऑपरेशंस के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सगीर बिन अज़ीज़ ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक सना वापस नहीं मिल जाता।
इस सैन्य कार्रवाई के पीछे 'मक्का पैक्ट' नामक आपसी रक्षा समझौते की बड़ी भूमिका है, जिसके तहत सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने तेजी से सैनिकों की तैनाती का वादा किया है। वहीं, अमेरिका इस अभियान में खुफिया जानकारी, टारगेट की पहचान और हवाई ईंधन भरने (aerial refueling) में मदद कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि सऊदी समर्थित सरकार के लिए अपने क्षेत्रों को वापस पाना जरूरी है।
दूसरी ओर, हूथी विद्रोहियों ने पलटवार करते हुए सऊदी अरब के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और एक अरामको रिफाइनरी पर हमले का दावा किया है। इस भीषण युद्ध के मानवीय परिणाम भी सामने आ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, जुलाई 2026 में युद्धविराम खत्म होने के बाद से हिंसा इतनी बढ़ी है कि अब तक 1,84,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं।