ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन: सऊदी गठबंधन के 100 लड़ाकू विमानों ने मचाया तांडव, 324 ठिकाने तबाह

यमन में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन सरकार की मदद के लिए ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन की शुरुआत करते हुए एक भीषण हवाई हमला किया है। इस बड़े सैन्य अभियान में गठबंधन ने एक साथ 100 लड़ाकू विमानों को मैदान में उतारा, जिससे हूती विद्रोहियों के खेमे में खलबली मच गई है। गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने पुष्टि की है कि इस हवाई हमले में 324 हाई-वैल्यू टारगेट को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है।
यह हमला केवल हवाई बमबारी तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर लड़ रही सरकारी सेना को चौबीसों घंटे हवाई सहायता प्रदान की जा रही है। गठबंधन ने यह भी साफ कर दिया है कि वह बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और होदेइदा में हूती समर्थित सैन्य ठिकानों को खत्म करना जारी रखेगा।
सना को आजाद कराने की तैयारी और भारी नुकसान
यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन रशाद अल-अलीमी ने जमीनी हमले की घोषणा करते हुए कहा है कि इस अभियान का मुख्य लक्ष्य राजधानी सना को आजाद कराना और वहां राज्य संस्थानों को फिर से बहाल करना है। संयुक्त ऑपरेशंस के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सगीर बिन अजीज ने भी संकल्प लिया है कि जब तक राजधानी वापस नहीं मिल जाती, यह सैन्य दबाव जारी रहेगा।
सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल माजिद अब्दुल्ला अल-नुज़यली के अनुसार, सरकारी बलों ने बाब अल-मंडेब क्षेत्र और धुबाब हवाई अड्डे पर रणनीतिक नियंत्रण हासिल कर लिया है। इससे धुबाब और मोचा के बीच हूतियों की सप्लाई लाइन पूरी तरह कट गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 1,122 सटीक हमलों में करीब 1,747 हूती लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया है।
क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए सऊदी अरब ने तुर्की और पाकिस्तान के साथ 'मक्का पैक्ट' रक्षा समझौते को सक्रिय कर दिया है ताकि सैनिकों की त्वरित तैनाती की जा सके। दूसरी ओर, हूतियों ने भी पलटवार करते हुए रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अरामको तेल रिफाइनरी पर हमले का दावा किया है।
इस भीषण युद्ध का सबसे बुरा असर आम जनता पर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में 2022 के युद्धविराम के टूटने के बाद से हिंसा इतनी बढ़ी है कि अब तक 1,84,000 से अधिक नागरिक विस्थापित हो चुके हैं। वहीं, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि वॉशिंगटन खुफिया जानकारी और हवाई ईंधन सहायता के जरिए सऊदी समर्थित सरकार का साथ देना जारी रखेगा।