खाड़ी देशों में 800 से ज्यादा भारतीय कामगारों की मौत, कई लापता और सुरक्षा चिंताएं बढ़ीं

Praggya Singh sabal17 September 20263 min read39 viewsExpat Issues
खाड़ी देशों में 800 से ज्यादा भारतीय कामगारों की मौत, कई लापता और सुरक्षा चिंताएं बढ़ीं

खाड़ी देशों में नौकरी की तलाश में जाने वाले भारतीय कामगारों के लिए हालात चिंताजनक बने हुए हैं। पिछले कुछ समय के दौरान सामने आई रिपोर्ट्स से पता चलता है कि विदेश में काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा और उनकी कार्यदशाओं पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। इस संकट के बीच परिवारों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है और लोग अपनों की सलामती के लिए परेशान हैं।

भारतीय कामगारों की मौत और लापता होने के मामले

विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से पंचजन्य द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच विदेशी कार्यस्थलों पर 800 से अधिक भारतीय कामगारों की जान चली गई। इन कुल मौतों में से 55 प्रतिशत अकेले खाड़ी देशों में हुईं, जिनमें 182 मौतें सऊदी अरब में और 128 मौतें यूएई में दर्ज की गईं। इसके अलावा तेलंगाना के कई परिवारों ने द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि ओमान, यूएई और सऊदी अरब गए कम से कम आठ लोग काम पर जाने के बाद से लापता हैं।

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लापता होने वाले व्यक्तियों में मेडक के चेगुंटला के रहने वाले 24 वर्षीय मोहम्मद सिलेमन शामिल हैं, जो जून महीने में टूरिस्ट वीजा पर ओमान गए थे। इसके अलावा जगतीयल के अल्लेश्वरपु रमेश 16 जून को यूएई से गायब हो गए, कामारेड्डी के मलुत कोटैया 30 जून के बाद सऊदी अरब में लापता हो गए और जगतीयल के मल्लापूर के रहने वाले भुख्या श्रीकांत से आखिरी बार 7 जून को दुबई के बानियास में संपर्क हुआ था।

डिटेंशन सेंटर और जेल में बंद भारतीय

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, हैदराबाद के याकूतपुरा निवासी मोहम्मद अफरोज साल 2014 से जेद्दा के अल-शुमाइसी डिटेंशन सेंटर में बंद बताए जा रहे हैं। वहीं मैसूर के सलमान फारिज़ मजदूरी के विवाद के बाद ज़ैनिक्स डिलीवरी सर्विसेज से जुड़े मामलों के चलते कथित तौर पर दुबई की जेल में बंद हैं। मजलिस बचाओ तहरीक ने सरकार से इन दोनों मामलों की आधिकारिक तौर पर पुष्टि करने की अपील की है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और हवाई यात्रा पर असर

खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा के हालात भी लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। सऊदी नीत गठबंधन ने जानकारी दी कि खमीस मुशैत, आभा और ताइफ में नागरिक ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से हमले हुए, जिसमें 13 नागरिक घायल हुए और सात घरों को नुकसान पहुंचा। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में सऊदी अरब में लगभग 27.48 लाख भारतीय रहते हैं। सुरक्षा और हालात के असर के कारण सियासत की रिपोर्ट के अनुसार हैदराबाद और 12 खाड़ी गंतव्यों के बीच दोतरफा हवाई यातायात 2025 की पहली छमाही के 17.65 लाख से घटकर 2026 की पहली छमाही में 15.22 लाख रह गया, जिसमें दोहा के लिए ट्रैफिक में 41 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई।

कारोबार और आधिकारिक सहायता प्रणाली

इन तमाम परेशानियों और सुरक्षा चिंताओं के बावजूद, द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार यूएई में व्यावसायिक गतिविधियों, संगीत कार्यक्रमों और नवरात्रि के आयोजनों में तेजी देखी गई है और प्लेटिनमलिस्ट के टिकटों की बिक्री में 65 प्रतिशत का उछाल आया है। प्रवासी भारतीय सहायता केंद्रों और ई-माइग्रेट सिस्टम जैसी आधिकारिक सहायता प्रणालियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं, लेकिन परिवारों द्वारा लगातार गायब होने की सूचनाएं मिलने और काम करने की स्थितियों पर सवाल उठने के कारण आलोचकों का मानना है कि ये उपाय अभी भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। वर्तमान में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों में भारत के लगभग एक करोड़ नागरिक रहते हैं, जिनमें अकेले यूएई में 43 लाख और सऊदी अरब में 27 लाख भारतीय शामिल हैं।

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