पाकिस्तान में अफगान मेडिकल छात्रों पर संकट, निष्कासन के आदेश से छात्रों का भविष्य खतरे में.

पाकिस्तान में पढ़ रहे अफगान मेडिकल और डेंटल छात्रों पर अब पढ़ाई छोड़ने का बड़ा संकट मंडराने लगा है। पाकिस्तान मेडिकल एंड डेंटल काउंसिल यानी PMDC के नए आदेश के बाद इन छात्रों को देश से बाहर निकाले जाने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। 1 सितंबर 2026 को जारी किए गए इस निर्देश में सभी मेडिकल कॉलेजों को तुरंत प्रभाव से अफगान छात्रों को हटाने और नए एडमिशन व ट्रांसफर रोकने को कहा गया है।
कड़े नियमों और कूटनीतिक तनाव का असर
एक वरिष्ठ स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी ने 9 सितंबर को यह पुष्टि की कि यह नियम विशेष रूप से अफगान नागरिकों पर लागू होता है। इसके पीछे की मुख्य वजह इस्लामाबाद और काबुल के बीच बिगड़ते कूटनीतिक रिश्ते बताए जा रहे हैं। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद 10 सितंबर को PMDC ने सफाई दी कि यह कोई राष्ट्रीयता के आधार पर लगाया गया प्रतिबंध नहीं है, बल्कि कागजी कार्रवाई और नियमों का पालन न करने का मामला है। काउंसिल के मुताबिक, पाकिस्तान में दो सौ से ज्यादा अफगान छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ 22 छात्र ही उनके पास रजिस्टर्ड हैं।
अधिकारियों और मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने साफ किया है कि जिन छात्रों के पास वैध पासपोर्ट और वीजा हैं, वे अपने वीजा की अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन जिनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें अवैध विदेशी प्रत्यावर्तन योजना यानी IFRP के तहत वापस भेजा जाएगा। दूसरी तरफ, ह्यूमन राइट्स वॉच और पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने इस नीति को पूरी तरह से भेदभावपूर्ण करार दिया है। अकेले लाहौर में लगभग 100 अफगान मेडिकल छात्र इस फैसले से प्रभावित हुए हैं, जिनमें 20 से 40 महिलाएं भी शामिल हैं। इन महिलाओं के लिए खतरा इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने महिलाओं की उच्च शिक्षा पर पहले ही रोक लगा दी है।
कॉलेजों के निर्देश और कानूनी लड़ाई
लाहौर के मशहूर किंग एडवर्ड मेडिकल यूनिवर्सिटी समेत कई संस्थानों ने प्रभावित छात्रों को अपनी वापसी की औपचारिकताएं पूरी करने का निर्देश दे दिया है। इस पूरी कार्रवाई से छात्रों के भविष्य को लेकर अफगान दूतावास ने गहरी चिंता जताई है। इसके अलावा, विपक्षी सीनेटर अल्लामा राजा नासिर अब्बास और अफगानिस्तान के लिए पूर्व विशेष प्रतिनिधि आसिफ दुरानी ने सरकार से इस मामले में नरमी बरतने की अपील की है। इस पूरे मामले की अधिक जानकारी आप ReliefWeb Report पर देख सकते हैं। छात्रों के समर्थन में 10 सितंबर को लाहौर हाईकोर्ट में कानूनी याचिका भी दाखिल कर दी गई है, जिस पर सुनवाई जारी है।