भारत के बगल में पाकिस्तान ने चालू किया नया Airstrike, अफगानियों का खौला खून, बोला मासूमो पर बम गिराए छक्को ने.

Lov Singh21 September 20262 min read6 viewsWorld
भारत के बगल में पाकिस्तान ने चालू किया नया Airstrike, अफगानियों का खौला खून, बोला मासूमो पर बम गिराए छक्को ने.

काबुल/इस्लामाबाद: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार तनाव एक बार फिर भड़कता दिख रहा है। ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के कुनार और पक्तिका प्रांतों के कई इलाकों में हमले किए, जिसमें नूरगल ज़िले का पटंग क्षेत्र भी शामिल है। पाकिस्तानी पक्ष से जुड़े कुछ अकाउंट्स का दावा है कि निशाना TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के आतंकी कैंप थे।

अफगान पक्ष का पलटवार — "निर्दोष परिवार बना निशाना"

वहीं दूसरी तरफ, अफगानिस्तान-समर्थक सोशल मीडिया पोस्ट्स में एक अलग ही तस्वीर पेश की जा रही है। इन पोस्ट्स के मुताबिक:

  • हमले में नूर मोहम्मद नाम के व्यक्ति का घर निशाना बना, जो एक मदरसे के पास स्थित था
  • इस हमले में 3 लोगों की मौत और 4 लोग घायल होने का दावा किया गया है
  • यह दावा अभी तक किसी आधिकारिक सूत्र से पुष्ट नहीं हुआ है — न पाकिस्तान और न ही अफगान तालिबान प्रशासन की तरफ से कोई बयान आया है
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यह कोई नई बात नहीं — पैटर्न लंबा और खूनी रहा है

कुनार, पक्तिका और पक्तिया — यह तीन प्रांत पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा तनाव का केंद्र बिंदु बने हुए हैं:

  • फरवरी 2026: नंगरहार और पक्तिका में हुए हमलों में पाकिस्तान ने 80 आतंकियों के मारे जाने का दावा किया, जबकि अफगान सूत्रों ने कम से कम 18 नागरिकों की मौत बताई
  • जून 2026: कुनार, पक्तिका और खोस्त पर हुए हमलों में पाकिस्तान ने 26 TTP लड़ाकों को मारने का दावा किया, अफगान सरकार ने कहा 13 नागरिक, ज़्यादातर बच्चे मारे गए
  • जून के अंत में: पक्तिया, पक्तिका और कुनार पर फिर हमला — पाकिस्तान ने 25-29 लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया, अफगान तालिबान ने कहा 36 नागरिक मारे गए

हर बार एक ही स्क्रिप्ट — "आतंकी कैंप" बनाम "नागरिक घर"

गौर करने वाली बात यह है कि हर बार यही टकराव देखने को मिलता है — पाकिस्तान अपने हमलों को "सटीक और सोची-समझी कार्रवाई" बताता है, जबकि अफगान तालिबान प्रशासन हर बार नागरिकों, महिलाओं और बच्चों की मौत का आरोप लगाता है। असली सच्चाई अक्सर धुंध में ही रह जाती है, क्योंकि इन दूरदराज़ पहाड़ी इलाकों में स्वतंत्र पत्रकारों की पहुंच बेहद सीमित है।

असली वजह — डूरंड लाइन का पुराना ज़ख्म

इस पूरे टकराव की जड़ में है डूरंड लाइन — पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच 2,670 किलोमीटर लंबी वह सीमा रेखा, जिसे अफगान तालिबान कभी मान्यता नहीं देता। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP लड़ाके अफगान ज़मीन का इस्तेमाल करके सीमा पार हमले करते हैं, जबकि तालिबान इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताता है।

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