अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों के बाद बढ़ी तल्खी, नागरिक हताहत होने के दावों से तनाव

अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों के बाद सीमा पार तनाव चरम पर पहुंच गया है। बुधवार देर रात और गुरुवार की शुरुआत में किए गए इन हमलों के बाद दोनों देशों के बीच हताहतों की संख्या को लेकर विरोधाभासी रिपोर्टें सामने आ रही हैं, जिससे इस क्षेत्र में स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।
अफगान अधिकारियों का दावा: महिलाएं और बच्चे शिकार
अफगान अधिकारियों ने इन हमलों के परिणामों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। रिपोर्टों के अनुसार, कुनार और हेलमंद प्रांतों में किए गए इन हमलों में कम से कम नौ महिलाओं और बच्चों की जान चली गई है, जबकि 11 अन्य लोग घायल हुए हैं। इस हमले में तीन घरों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबरुल्लाह मुजाहिद ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे एक आक्रामक कृत्य करार दिया है। वहीं, उप प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने पुष्टि की है कि मरने वालों में मुख्य रूप से महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय के अनुसार, कुनार के सुल्तान जिले और हेलमंद के गार्मसर जिले में हुई इन घटनाओं में आठ लोगों की मौत हुई है, सात घायल हुए हैं और एक बच्चा लापता है।
पाकिस्तान का पक्ष: आतंकवादियों को निशाना बनाने का दावा
दूसरी ओर, पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने इन हमलों के पीछे अपना तर्क पेश किया है। पाकिस्तान का कहना है कि ये ऑपरेशन पूरी तरह से "सुनियोजित और सटीक" थे, जो विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर किए गए थे।
पाकिस्तान के दावों के मुताबिक:
- इन हमलों का उद्देश्य 'तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (TTP) और 'बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी' (BLA) से जुड़े आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करना था।
- पाकिस्तान ने दावा किया कि इस कार्रवाई में 22 उग्रवादी मारे गए और भारी मात्रा में हथियार नष्ट किए गए।
- मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि नागरिक नुकसान को कम करने के लिए हर संभव सावधानी बरती गई थी।
- यह कार्रवाई पाकिस्तानी सीमा के भीतर हाल ही में हुए आतंकवादी हमलों के जवाब में की गई है।
बढ़ता सीमा पार संघर्ष और मानवीय संकट
यह घटना पिछले 10 दिनों के भीतर अफगानिस्तान के भीतर पाकिस्तानी हवाई हमलों का तीसरा दौर है। हालांकि अफगानिस्तान लगातार यह दावा कर रहा है कि वह किसी भी उग्रवादी समूह को पनाह नहीं दे रहा है, लेकिन सीमा पार हो रही हिंसा का असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र मिशन इन अफगानिस्तान (UNAMA) की रिपोर्ट एक भयावह तस्वीर पेश करती है। इस वर्ष अब तक सीमा पार हिंसा के कारण अफगानिस्तान में 1,100 से अधिक नागरिक हताहत हो चुके हैं, जो इस क्षेत्र में बढ़ते मानवीय संकट की ओर इशारा करता है।