Pakistan: मानवाधिकार वकीलों की फिर से हुई गिरफ्तारी, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जताई कड़ी नाराजगी

पाकिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और वकीलों पर कानूनी कार्रवाई का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामले में पाकिस्तान की एक अदालत द्वारा जमानत मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर दो जाने-माने वकीलों को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया है। इस पूरी घटना के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन Amnesty International ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है और पाकिस्तान सरकार के इस कदम की तीखी आलोचना की है। संगठन का साफ कहना है कि वकीलों को बेवजह परेशान किया जा रहा है और कानूनी प्रणाली का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट से मिली थी राहत
Amnesty International की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर को मानवाधिकार वकील Imaan Mazari-Hazir और Hadi Ali Chattha को जमानत दे दी थी और उनकी सजा पर रोक लगा दी थी। इन दोनों वकीलों को लगभग आठ महीने की मनमाने ढंग से हिरासत में रखने के बाद यह राहत मिली थी। इन वकीलों को मूल रूप से पिछले साल 23 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के अगले ही दिन उन्हें प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत 10 से 17 साल तक की जेल की सजा सुनाई गई थी। इन सजाओं का मुख्य कारण सोशल मीडिया पर अधिकारियों की आलोचना करने वाले पोस्ट बताए गए थे, जिनमें कथित तौर पर अपराध को बढ़ावा देने और साइबर आतंकवाद के आरोप शामिल थे।
जेल से बाहर आते ही दोबारा हिरासत
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद दोनों वकीलों को तुरंत रिहा नहीं किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 17 सितंबर को रात करीब 9:30 बजे जब उनकी रिहाई के कागजात तैयार किए जा रहे थे, तब रावलपिंडी की अदियाला जेल के अंदर ही पुलिस ने दोनों वकीलों को फिर से अपनी हिरासत में ले लिया। इसके बाद उन्हें एक आतंकवाद-रोधी अदालत के जज के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिनों के लिए दोबारा अदियाला जेल भेजने का आदेश दिया गया। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बताया कि यह नया मामला 22 मार्च 2025 को दर्ज किया गया था, जिसमें उन पर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकार विरोधी नारे लगाने और सड़कों को जाम करने का आरोप लगाया गया है।
मानवाधिकार संगठन की तीखी प्रतिक्रिया
एमनेस्टी इंटरनेशनल के दक्षिण एशिया के उप क्षेत्रीय निदेशक Babu Ram Pant ने इस पूरी कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह ताजा गिरफ्तारी इस बात को पूरी तरह साफ करती है कि वकीलों के खिलाफ लगाए गए आरोप केवल उनके मानवाधिकार के कामों के लिए उन्हें सजा देने का एक राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रयास है। उन्होंने कहा कि अधिकारी आलोचना करने वाली आवाजों के खिलाफ कानूनी व्यवस्था का हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। संगठन ने मांग की है कि पाकिस्तानी अधिकारियों को न्याय प्रणाली का दुरुपयोग तुरंत बंद करना चाहिए और दोनों वकीलों को बिना किसी शर्त के तुरंत रिहाई देनी चाहिए, ताकि उनकी कैद लंबी न खींची जा सके।