Saudi Arabia पर हूती हमलों के बाद पाकिस्तान का बड़ा बयान, रक्षा समझौते पर संभलकर चल रहा इस्लामाबाद.

हूती लड़ाकों की तरफ से सऊदी अरब के कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए जाने के बाद मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है। इन हमलों में कई लोग घायल हुए और तेल सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा है, जिसके बाद सुरक्षा हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। इस पूरे मामले पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि मक्का ज्वॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट को सक्रिय किया जा सकता है। यह एक त्रिपक्षीय समझौता है जिस पर पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते में नाटो के आर्टिकल 5 जैसी शर्तें शामिल हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थिति को लेकर अभी काफी सावधानी बरती जा रही है।
हूती बलों ने हाल ही में लाल सागर के तटीय शहर मोचा पर कब्जा कर लिया है, जिससे यमन के पूरे लाल सागर तट पर उनका नियंत्रण हो गया है। साल 2022 में संयुक्त राष्ट्र के समर्थन से हुए संघर्षविराम के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा तनाव माना जा रहा है। इन हालातों के बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Sajjad Haider Khan ने अपनी साप्ताहिक ब्रीफिंग में साफ किया है कि फिलहाल इस तरह के किसी भी सैन्य कदम पर कोई चर्चा नहीं चल रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार सही समय आने पर ही कोई उचित फैसला लेगी और किसी भी जल्दबाजी से बचा जाएगा।
सऊदी अरब में पाकिस्तान की सैन्य मौजूदगी और विकल्पों पर विचार
मौजूदा समय में पाकिस्तान की एक बड़ी सैन्य मौजूदगी सऊदी अरब में है। लगभग 8,000 पाकिस्तानी सैनिक, फाइटर जेट, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम सऊदी अरब में तैनात हैं। ये सभी सामरिक आपसी रक्षा समझौते के तहत काम कर रहे हैं जिस पर सितंबर 2025 में हस्ताक्षर किए गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि पाकिस्तान सादाह में हूती ठिकानों पर संभावित हवाई हमलों पर विचार कर रहा है, हालांकि इस पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इसके अलावा सऊदी अरब के एयरस्पेस को मजबूत करने, मिसाइल रोकने में मदद करने और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे विकल्प भी विचाराधीन हैं।
कूटनीतिक रास्तों की तलाश और कड़ा रुख
एक तरफ जहां सैन्य समझौतों और विकल्पों पर बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान कूटनीतिक रास्तों का भी पूरा इस्तेमाल कर रहा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख Field Marshal Asim Munir ने ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के साथ बातचीत की है। इस बातचीत के दौरान उन्होंने सऊदी अरब की तरफ से मिली चेतावनियों को ईरान तक पहुंचाया और उनसे अपने सहयोगी हूती विद्रोहियों के मामलों में संयम बरतने की अपील की है। विश्लेषकों का मानना है कि भले ही रक्षा समझौता पूरी तरह वैध है, लेकिन इस्लामाबाद सीधे तौर पर सैन्य हस्तक्षेप करने से जुड़े बड़े जोखिमों और खर्चों से बचने के लिए कूटनीति को सबसे ऊपर रख रहा है ताकि इलाके में शांति बनी रहे।