Pakistan और Iran के बीच फंसा मामला, Saudi Houthi conflict पर Islamabad ने अपनाया नया रुख.

पाकिस्तान इन दिनों सऊदी अरब और ईरान के बीच एक बेहद नाजुक कूटनीतिक दौर से गुजर रहा है। देश की सरकार सऊदी हौथी संघर्ष के मामले में बेहद सावधानी बरत रही है ताकि तेहरान के साथ उसके पारंपरिक और बेहद जरूरी रिश्ते खराब न हों। पाकिस्तान की यह कोशिश है कि वह इस पूरे विवाद से अपने आपको दूर रखे क्योंकि देश के अपने राष्ट्रीय हित दांव पर लगे हैं। इस्लामाबाद लगातार क्षेत्रीय दबाव को संभालते हुए ईरान के साथ अपने संबंधों को सुरक्षित रखने की पूरी कोशिश कर रहा है। सरकार नहीं चाहती कि इस क्षेत्रीय तनाव का असर उसके द्विपक्षीय संबंधों पर पड़े।
कूटनीतिक प्रयास और आधिकारिक रुख
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि देश लगातार क्षेत्र में शांति बनाए रखने की वकालत कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने एक बयान में पुष्टि की कि पाकिस्तान ने हमेशा से ही किसी भी तरह की हिंसा और तनाव बढ़ने का विरोध किया है। देश लगातार कूटनीति, बातचीत और संयम बरतने की बात कह रहा है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस समय किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या प्रतिक्रिया पर विचार नहीं किया जा रहा है। सरकार का पूरा ध्यान केवल और केवल कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से हालात को संभालने पर है। पाकिस्तान ने सऊदी अरब की चिंताओं को भी ईरानी अधिकारियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया है ताकि हौथी ताकतों को रोका जा सके।
रक्षा समझौते और क्षेत्रीय जोखिम
यह पूरा कूटनीतिक संकट मक्का म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट की वजह से और अधिक जटिल हो गया है। इस समझौते में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए की सुरक्षा के हित आपस में जुड़े हुए हैं। इस समझौते के नियमों के मुताबिक, अगर इनमें से किसी भी एक देश पर हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाता है। देश के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट किया है कि अगर सऊदी अरब की सीमा के अंदर कोई गंभीर हमला होता है या स्थिति बहुत ज्यादा बिगड़ती है, तो इस रक्षा समझौते के सक्रिय होने की पूरी संभावना है। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों का यह भी कहना है कि किसी भी संभावित मदद की सीमा केवल सऊदी सीमाओं के भीतर की रक्षात्मक कार्रवाइयों तक ही सीमित रहेगी।
पाकिस्तान सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी इस संभावित सहायता में यमन के अंदर सैनिक भेजना या हौथी ठिकानों पर किसी भी प्रकार के जवाबी हवाई हमले करना शामिल नहीं होगा। सरकार बहुत बारीकी से पूरे क्षेत्रीय घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। पाकिस्तान की यह प्राथमिकता है कि वह किसी भी ऐसे सीधे सैन्य संघर्ष में न फंसे जिससे क्षेत्र में ईरान के प्रभाव के सामने उसके अपने हित खतरे में पड़ जाएं। पाकिस्तान के इस आधिकारिक रुख के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की प्रेस रिलीज पर जा सकते हैं, जहां इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी किया गया है।