पाकिस्तान की अदालत ने मानवाधिकार वकील ईमान मजारी और उनके पति को सुनाई 10 साल की जेल

रावलपिंडी की अदालत ने मानवाधिकार वकील ईमान मजारी और उनके पति हादी अली चत्था को आतंकवाद के आरोपों में 10 साल की सजा सुनाई है।

Gautam Sahu29 October 20262 min read0 viewsWorld
पाकिस्तान की अदालत ने मानवाधिकार वकील ईमान मजारी और उनके पति को सुनाई 10 साल की जेल

रावलपिंडी: पाकिस्तान की एक आतंकवाद विरोधी अदालत ने मानवाधिकार वकील ईमान मजारी और उनके पति हादी अली चत्था को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला 29 अक्टूबर 2026 को जज ताहिर अब्बास सिप्रा ने अडियाला जेल में सुनाया।

यह मामला 25 अक्टूबर 2024 की एक घटना से जुड़ा है। आरोप है कि इस्लामाबाद में इंग्लैंड क्रिकेट टीम के दौरे के दौरान सुरक्षा बैरियर हटाए गए थे। अदालत ने माना कि दोनों ने आतंक फैलाने के साझा इरादे से काम किया और उन्हें 1997 के आतंकवाद विरोधी अधिनियम की धारा 7(h) के तहत दोषी पाया। इस धारा के तहत दोनों पर 1 लाख पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

इसके अलावा, कोर्ट ने लोक सेवक के काम में बाधा डालने के लिए धारा 186 के तहत एक साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया। वहीं, लोक सेवक के खिलाफ हमला या आपराधिक बल प्रयोग के लिए धारा 353 के तहत दो साल की सजा और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, जिससे कुल जेल की अवधि 10 साल होगी।

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ईमान मजारी और उनके पति ने खुद को 'अंतरात्मा का कैदी' बताया है और आरोपों को नकारा है। उनके परिवार और पूर्व मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी ने इस मुकदमे को दिखावा बताया है। बचाव पक्ष का आरोप है कि उन्हें अपने वकील पेश करने से रोका गया, जरूरी दस्तावेज नहीं दिए गए और कार्यवाही के दौरान पिंजरे में खड़ा रहने को मजबूर किया गया, जिससे बचाव पक्ष से बात करना मुश्किल हो गया।

बचाव पक्ष की वकील ज़ैनब जंजुआ ने पुष्टि की है कि इस फैसले को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। इससे पहले 23 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में उन्हें 17 साल की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर 2026 को उस सजा पर रोक लगाते हुए जमानत दे दी थी, लेकिन आतंकवाद के आरोपों में उन्हें तुरंत फिर से गिरफ्तार कर लिया गया।

एमनेस्टी इंटरनेशनल की यास्मीन अहमद ने इस फैसले को पाकिस्तान की न्याय प्रणाली पर एक धब्बा बताया है। ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के लिए आपराधिक मुकदमों के इस्तेमाल को रोकने की अपील की है। दूसरी ओर, पाकिस्तान के कानून मंत्री आज़म नज़ीर तरार ने कहा है कि देश की न्यायपालिका स्वतंत्र है।

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