अमेरिका और ईरान की जंग पर पाकिस्तान का बड़ा बयान, कहा यह तनाव क्षेत्रीय शांति के लिए ठीक नहीं.

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सैन्य तनातनी पर Pakistan ने अपनी औपचारिक प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान का कहना है कि दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव को किसी भी तरह से सही नहीं माना जा सकता और इस स्थिति को पूरी तरह से अवांछनीय बताया गया है। पाकिस्तान को उम्मीद है कि आने वाले समय में दोनों देश बातचीत के रास्ते पर लौटेंगे और कूटनीतिक स्तर पर मामले को सुलझाने की कोशिश करेंगे। यह बात पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Ishaq Dar ने ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के साथ मुलाकात के दौरान कही। यह बैठक 1 सितंबर 2026 को बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी।
इस्लामाबाद समझौते पर जोर
मुलाकात के दौरान पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्रीय स्थिरता को बचाने के लिए केवल एक ही रास्ता बचा है। उन्होंने कहा कि जून 2026 में हुए Islamabad Memorandum of Understanding को पूरी ईमानदारी से लागू किया जाना चाहिए। इस समझौते की 60 दिनों की समय सीमा अगस्त के बीच में ही खत्म हो चुकी थी। इस समझौते के तहत शत्रुता को पूरी तरह रोकने, ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को खत्म करने की बात कही गई थी। लेकिन जमीनी हालात इसके बिल्कुल उलट चल रहे हैं और दोनों देशों के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है।
अमेरिका और ईरान की सैन्य कार्रवाई
एक तरफ कूटनीतिक बातचीत चल रही थी तो दूसरी तरफ जंग का मैदान भी गर्म था। 1 सितंबर 2026 को अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के खिलाफ बहुत बड़ा सैन्य हमला किया। इस बड़े हमले में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के लगभग 100 लक्ष्यों को निशाना बनाया गया। इनमें एयर-डिफेंस सिस्टम, रडार का सामान, समुद्री ठिकाने और कम्युनिकेशंस साइट्स शामिल थीं। इसके जवाब में ईरान ने भी चुप बैठना मुनासिब नहीं समझा। ईरान ने इसके ठीक अगले दिन यानी 2 सितंबर 2026 को जॉर्डन, इराक और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले कर दिए।
डोनाल्ड ट्रम्प और मोजतबा खामेनेई का कड़ा रुख
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने किसी भी तरह की बातचीत की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका प्रशासन तेहरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश नहीं कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वे इस समय लगाए गए आर्थिक और सैन्य दबाव के नतीजों से पूरी तरह संतुष्ट हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने दक्षिणी ईरान पर भारी हमलों के आदेश दिए हैं और चेतावनी दी है कि अगर इस क्षेत्र से कोई भी दोबारा जवाबी कार्रवाई हुई तो और भी खतरनाक हमले किए जाएंगे। दूसरी तरफ ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने अमेरिकी दुश्मन को बहुत कड़ा सबक सिखाने की बात कही है और कसम खाई है कि इस हमले का पूरा बदला लिया जाएगा। इस खतरनाक होती स्थिति को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे बहुत ज्यादा संयम बरतें ताकि इस इलाके में और अधिक अस्थिरता न फैले।