पाकिस्तान का बड़ा बयान, कहा- डोनाल्ड ट्रंप के दूत नहीं थे आर्मी चीफ आसिम मुनीर

पाकिस्तान सरकार ने उन तमाम खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि उनके डिफेंस फोर्सेज के चीफ यानी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने तेहरान यात्रा के दौरान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत के रूप में काम किया था। इस मामले पर आधिकारिक जानकारी देते हुए पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्रेबी ने 27 अगस्त 2026 को साफ किया कि ये सभी दावे पूरी तरह से भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह दौरा पूरी तरह से वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने के लिए था और इसका किसी अन्य मकसद से कोई लेना-देना नहीं था। पाकिस्तान लगातार दोनों देशों के बीच रुकी हुई शांति वार्ताओं को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश में जुटा हुआ है ताकि क्षेत्र में शांति कायम हो सके।
तेहरान दौरा और उच्च स्तरीय बैठकें
फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अपने इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान अकेले यात्रा नहीं की थी, बल्कि उनके साथ देश के इंटीरियर मिनिस्टर मोहसिन नकवी भी मौजूद थे। यह पूरा प्रतिनिधिमंडल 24 अगस्त 2026 को तेहरान पहुंचा था जहाँ उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान समेत कई बड़े और शीर्ष नेताओं के साथ लंबी बातचीत की। यह दौरा ऐसे समय में हुआ था जब पिछले हफ्ते ही ऐसी रिपोर्ट सामने आई थी कि डोनाल्ड ट्रंप ने आसिम मुनीर से बातचीत की थी और पाकिस्तान से यह अनुरोध किया था कि वह अपनी कूटनैतिक ताकत का इस्तेमाल करके अमेरिका और ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर वापस लाने में मदद करे।
वार्ता के बाद सामने आए सकारात्मक परिणाम
जब पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल अपनी यात्रा पूरी करके वापस लौटा, तो दोनों देशों की तरफ से यह बताया गया कि इस यात्रा के दौरान काफी प्रगति हुई है। वापसी के तुरंत बाद 25 अगस्त को मोहसिन नकवी ने इस पूरी यात्रा को बेहद उत्पादक बताया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में यह जानकारी दी कि इस दौरान मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव और संघर्ष को कम करने पर चर्चा हुई। साथ ही, जून 2026 में हुए इस्लामाबाद एमओयू यानी समझौता ज्ञापन को दोबारा बहाल करने पर भी जोर दिया गया, जो कि अगस्त के बीच में किन्हीं कारणों से रुक गया था। इसके अलावा ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय के कम्युनिकेशंस एंड इंफॉर्मेशन डिपार्टमेंट के डिप्टी सयेद मेहदी तबाताबी ने भी इस बात की पुष्टि की कि इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात से दोनों देशों को कूटनीतिक मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है।
अभी भी बनी हुई हैं कुछ शर्तें
हालांकि दोनों पक्षों की तरफ से मध्यस्थता की इन कोशिशों को सराहा जा रहा है, लेकिन ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए एक बार फिर यह दोहराया कि अमेरिका को इस्लामाबाद समझौते के तहत किए गए अपने पुराने वादों और प्रतिबद्धताओं का पूरा सम्मान करना ही होगा। उनका साफ कहना था कि जब तक अमेरिका तेहरान के प्रति अपने रवैये और नीति में बदलाव नहीं लाता, तब तक क्षेत्र में स्थाई और पक्की शांति सुनिश्चित करना मुमकिन नहीं हो पाएगा।