पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित बाल्टिस्तान में स्थानीय चुनाव महज दिखावा हैं और चुने हुए प्रतिनिधियों को असली ताकत नहीं मिलेगी

राजनीतिक कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने PoGB में होने वाले स्थानीय चुनावों को महज एक दिखावा बताते हुए पाकिस्तान की आलोचना की है।

Gautam Sahu23 October 20262 min read0 viewsWorld
पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित बाल्टिस्तान में स्थानीय चुनाव महज दिखावा हैं और चुने हुए प्रतिनिधियों को असली ताकत नहीं मिलेगी

स्कॉटलैंड: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के राजनीतिक कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में प्रस्तावित स्थानीय चुनावों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी कवायद बिना किसी वास्तविक लोकतांत्रिक सशक्तिकरण के केवल एक और राजनीतिक व्यवस्था बनकर रह सकती है।

यूट्यूब पर जारी एक वीडियो में मिर्जा ने सवाल उठाया कि 5 दिसंबर 2026 को होने वाले इन चुनावों से क्या वाकई अधिकार चुने हुए प्रतिनिधियों को मिलेंगे। उन्होंने आशंका जताई कि यह मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचे के तहत केवल लोकतंत्र का दिखावा हो सकता है।

मिर्जा ने स्थानीय पार्षदों, परिषदों और मेयरों को मिलने वाली शक्तियों को लेकर स्पष्टता की कमी पर भी जोर दिया। उन्होंने पूछा कि क्या चुने हुए प्रतिनिधियों को स्थानीय समस्याओं को हल करने के लिए पर्याप्त अधिकार और विकास निधि दी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि सिर्फ चुनाव कराने से लोकतांत्रिक शासन की गारंटी नहीं मिलती।

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कार्यकर्ता ने इन प्रस्तावित चुनावों की तुलना PoJK में 33 साल के अंतराल के बाद हुए स्थानीय निकाय चुनावों से की। उन्होंने दावा किया कि वहां के पार्षद बिना पर्याप्त शक्तियों और विकास फंड के काम कर रहे हैं, जबकि असली अधिकार कहीं और केंद्रित हैं।

उन्होंने PoJK में जॉइंट अवमी एक्शन कमेटी (JAAC) की मांगों का भी जिक्र किया। मिर्जा ने आरोप लगाया कि विधानसभा की 12 सीटों का इस्तेमाल सरकार बनाने और राजनीतिक परिणामों को प्रभावित करने के लिए किया जाता है, इसलिए उन्हें खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने इस आंदोलन को राजनीतिक अधिकारों, जवाबदेही और कानून के शासन की व्यापक मांगों से जोड़ा।

PoGB के राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए उन्होंने अहसन अली एडवोकेट और बाबा जान जैसे कार्यकर्ताओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में अधिकारों की मांग को लेकर राजनीतिक लामबंदी और जेल जाने का एक लंबा इतिहास रहा है। मिर्जा के मुताबिक, अलग-अलग राजनीतिक और वैचारिक विमर्शों की वजह से PoGB के राजनीतिक भविष्य के लिए एक एकजुट आंदोलन खड़ा नहीं हो पाया है।

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