सऊदी अरब पर हूती हमलों की पाकिस्तान और मिस्र ने कड़ी निंदा की और जरूरत पड़ने पर सैन्य मदद देने का भरोसा दिया

रियाद: पाकिस्तान और मिस्र ने सऊदी अरब के खिलाफ हूती मिलिशिया द्वारा किए गए हालिया हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। रविवार 18 अक्टूबर 2026 को पाकिस्तानी उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशहाक डार और मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलत्ती ने फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने सऊदी अरब की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा के प्रति अपनी पूरी एकजुटता जताई है।
मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलत्ती ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा मिस्र की राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अहम हिस्सा है। उन्होंने रणनीतिक समुद्री गलियारों या जलडमरूमध्य को राजनीतिक दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का विरोध किया।
राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी की अध्यक्षता में मिस्र की राष्ट्रीय रक्षा परिषद की बैठक हुई। इसके बाद मिस्र सरकार ने सऊदी संसाधनों और इस्लामी पवित्र स्थलों की रक्षा के लिए जरूरी सहायता देने की तैयारी जाहीर की है। राष्ट्रपति अल-सीसी ने जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने की मंजूरी के लिए संसद का तत्काल सत्र बुलाने का अनुरोध किया है। सोमवार 19 अक्टूबर तक इस पर विचार-विमर्श जारी था।
राष्ट्रपति के प्रवक्ता मोहम्मद अल-शेनवी ने बताया कि सऊदी अरब की रक्षा व्यापक अरब राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हुई है। यह राजनयिक हलचल ऐसे समय में हुई है जब हूती मिलिशिया ने रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और सऊदी अरामको की सुविधाओं को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।
हाल ही में नजरान क्षेत्र में सऊदी गठबंधन का एक AH-6i टोही हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें दो एयरक्रू अधिकारियों की मौत हो गई। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मल्की ने इसे तकनीकी खराबी बताया, जबकि हूती प्रवक्ता यह्या सारे ने दावा किया कि उनके समूह ने विमान को मार गिराया है। इसके अलावा रियाद और पूर्वी प्रांत में दो ड्रोन और खामिस मुशैत के पास दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोका गया है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशहाक डार ने इस स्थिति और बगदाद में चल रही ओआईसी (OIC) की बैठक को लेकर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी अलग से चर्चा की। पाकिस्तान और मिस्र ने तुर्की सहित R-4 सहयोग ढांचे के महत्व पर जोर दिया है। पूर्व मिस्र विदेश मंत्री मोहम्मद अल-ओराबी ने चेतावनी दी है कि हूती मिलिशिया द्वारा हिंसा का सहारा लेने से भविष्य के राजनीतिक समाधान की उम्मीदें खत्म हो सकती हैं।