पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी की तैयारी? PTI के मार्च से बढ़ी हलचल

Gautam Sahu1 October 20262 min read4 viewsWorld
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी की तैयारी? PTI के मार्च से बढ़ी हलचल

पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। खैबर पख्तूनख्वा (KP) में बिगड़ते सुरक्षा हालातों और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) द्वारा इस्लामाबाद की ओर किए जाने वाले विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर, पाकिस्तान सरकार इस प्रांत में आपातकाल (Emergency) लागू करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

सुरक्षा और विरोध प्रदर्शन का संकट

रिपोर्ट्स के अनुसार, सत्ताधारी गठबंधन ने चेतावनी दी है कि यदि PTI के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार 4 अक्टूबर को इस्लामाबाद की ओर बढ़ने वाले मार्च को वापस नहीं लेती है, तो प्रांत में गवर्नर शासन या आपातकाल लागू किया जा सकता है। यह मार्च PTI संस्थापक इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर आयोजित किया जा रहा है, जो संघीय सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का मुख्य कारण बन गया है।

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अनुच्छेद 232 के तहत कार्रवाई की संभावना

संसदीय मामलों के संघीय मंत्री तारिक फजल चौधरी ने संसद भवन में मीडिया से बात करते हुए संकेत दिए कि प्रांत में आतंकवाद को नियंत्रित करने में स्थानीय सरकार की विफलता इस कदम का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा:

"प्रांतीय सरकार की आतंकवाद को नियंत्रित करने में रुचि या सफलता की कमी ही वह कारण है, जिसकी वजह से अनुच्छेद 232 के तहत आपातकाल लगाने पर चर्चा की जा रही है।"

मंत्री ने यह भी भरोसा जताया कि सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) की प्रमुख सहयोगी पार्टी, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP), इस कदम का समर्थन करेगी।

PPP का रुख: कानून और व्यवस्था पर चिंता

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए, PPP के महासचिव नय्यर हुसैन बुखारी ने कहा कि यदि संघीय प्रशासन गवर्नर शासन लागू करने के बारे में उनकी पार्टी से सलाह लेता है, तो वे संविधान और कानून के अनुसार अपनी राय देंगे। उन्होंने प्रांत में कानून-व्यवस्था की स्थिति को "अत्यंत चिंताजनक" बताया।

बुखारी ने स्पष्ट किया कि हालांकि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन "राजनीति की आड़ में राज्य पर हमला करना" पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए और राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान केवल सार्थक राजनीतिक संवाद के माध्यम से ही संभव है।

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