खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तान सरकार ने लगाया आपातकाल और गवर्नर रूल, इमरान खान की पार्टी की सरकार हुई निलंबित

इस्लामाबाद (पाकिस्तान): पाकिस्तान की सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल और गवर्नर रूल लागू कर दिया है। इस फैसले के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेतृत्व वाले क्षेत्रीय प्रशासन को व्यावहारिक रूप से निलंबित कर दिया गया है।
यह आपातकालीन निर्देश रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय चार्टर के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत लागू किया गया। खैबर पख्तूनख्वा के 12 जिलों को सीधे संघीय शासन के अधीन रखा गया है, जिससे वहां न्यायिक और कार्यकारी शक्तियों का संवैधानिक अलगाव खत्म हो गया है।
सुरक्षा स्थिति को संभालने में विफलता के बाद प्रशासन ने रातों-रात यह कदम उठाया है। इसके साथ ही वहां सैन्य बलों की तैनाती की गई है और नागरिक अधिकारियों की जगह गैर-निर्वाचित अधिकारियों के पास शक्तियां केंद्रित कर दी गई हैं।
इस कार्रवाई के दौरान विपक्षी नेताओं और विधायकों को हिरासत में लिया गया है और उनके घरों पर छापेमारी की गई है। सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने वालों पर पुलिस फायरिंग और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया गया, जिसके बाद कई लोगों की गिरफ्तारियां हुई हैं।
पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि कोई अपने पिछवाड़े में सांप पालकर यह उम्मीद नहीं कर सकता कि वे केवल पड़ोसियों को काटेंगे, क्योंकि अंततः वे अपने पालने वालों पर ही हमला करेंगे।
जनरल बाजवा के कार्यकाल के दौरान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के कैडरों को पूर्व फेडरली एडमिनिस्ट्रेटेड ट्राइबल एरिया (FATA) और खैबर पख्तूनख्वा के कुछ हिस्सों में स्थानांतरित किया गया था। विश्लेषकों का कहना है कि जरब-ए-अजब और रद-उल-फसाद जैसे पिछले ऑपरेशनों के दौरान मानवाधिकारों का व्यापक उल्लंघन हुआ था।
प्रांत में विकास और घटनाओं पर पूरी तरह से मीडिया प्रतिबंध लगा दिया गया है। खैबर पख्तूनख्वा के आदिवासी समुदाय पहले ही विस्थापन और असुरक्षा झेल रहे हैं, जहां हजारों परिवार अब भी अपनी वापसी और पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं।