खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लगाने को शहबाज शरीफ ने बताया मजबूरी, PTI पर आतंकवाद विरोधी अभियान में सहयोग न करने का लगाया आरोप

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी और गवर्नर रूल लागू करने के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार को यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। शहबाज शरीफ ने विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेतृत्व वाले प्रशासन पर आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग न करने का आरोप लगाया है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने बातचीत के जरिए मामला सुलझाने की आखिरी कोशिश की थी। उनके मुताबिक, सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने 48 घंटे तक दिन-रात गहन चर्चा की। इस बातचीत के बाद एक ड्राफ्ट भी तैयार था, जिसके तहत PTI को अपना लॉन्ग मार्च वापस लेना था।
शहबाज शरीफ ने कहा कि उन्होंने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और उनके पूर्ववर्ती अली अमीन गंडापुर के साथ कई बैठकें की थीं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को भरोसा दिलाया था कि प्रशासनिक, संसाधन और परिचालन संबंधी निर्णय सीधे उनके परामर्श से लिए जाएंगे। हालांकि, पीएम ने शिकायत की कि सरकार की कोशिशों के जवाब में हर दूसरे दिन धमकी और लॉन्ग मार्च का सामना करना पड़ा।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने PTI के पुराने इतिहास को डरावना बताया। उन्होंने 2014 के उन धरनों का जिक्र किया जो उनके भाई नवाज शरीफ के कार्यकाल के दौरान इस्लामाबाद के डी-चौक पर हुए थे। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल नवंबर के विरोध प्रदर्शनों के कारण पूरा देश जाम हो गया था और सुरक्षा बलों के साथ हिंसक झड़पें हुई थीं।
इससे पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 11 अक्टूबर 2026 को संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल घोषित किया था। इस आदेश के जरिए चुनी हुई प्रांतीय सरकार की शक्तियों को निलंबित कर दिया गया और सीधा गवर्नर रूल लागू कर दिया गया। इसके बाद सरकार ने PTI के कई बड़े नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को गिरफ्तार कर लिया है।
इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे सेना समर्थित सत्ता कब्जा बताया है। फाउंडेशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि सड़कों पर सेना की तैनाती, चुने हुए मुख्यमंत्री की जेल और इंटरनेट बंद करना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। संस्था ने इलाके में लोकतांत्रिक अधिकारों को बहाल करने की मांग की है।