पाकिस्तान में सरकार की नीतियों के खिलाफ किसानों का हल्ला बोल, राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन का ऐलान

पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र में इस समय भारी आक्रोश देखा जा रहा है। सरकार की कथित 'किसान विरोधी' नीतियों से नाराज होकर 36 किसान संगठनों के गठबंधन, पाकिस्तान किसान रबीता कमेटी (PKRC) ने 18 अक्टूबर को पूरे देश में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। किसानों का मानना है कि मौजूदा सरकारी नीतियां उन्हें आर्थिक रूप से बर्बाद कर रही हैं, जिससे अब सड़क पर उतरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।
किसानों की मुख्य मांग यह है कि सरकार गेहूं की समर्थन कीमत 5,000 पाकिस्तानी रुपये प्रति मन और गन्ने की कीमत 700 रुपये प्रति 40 किलो तय करे। यह फैसला पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध जैसे विभिन्न प्रांतों के किसान समूहों की एक अहम बैठक के बाद लिया गया है।
बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितता से किसान परेशान
PKRC के अध्यक्ष तारिक महमूद ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि किसान बीज, खाद, कीटनाशकों और डीजल पर भारी खर्च करते हैं, लेकिन जब फसल बाजार में आती है, तो उन्हें उचित दाम नहीं मिलते। उन्होंने कहा कि किसानों को पूरी तरह से बाजार की अनिश्चितताओं के भरोसे छोड़ दिया गया है, जबकि खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है।
कमेटी के महासचिव रिफ़त मक्सूद ने मौजूदा नीति ढांचे पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर इनपुट लागत इसी तरह बढ़ती रही और खरीद की कोई गारंटी नहीं रही, तो पाकिस्तान में कृषि का भविष्य क्या होगा। वहीं, केंद्रीय नेता फारूक तारिक ने चेतावनी दी कि किसानों से सलाह लिए बिना लिए गए फैसले देश की खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं। उन्होंने मांग की कि बुवाई शुरू होने से पहले समर्थन कीमतों की घोषणा की जाए ताकि किसान तय कर सकें कि खेती करना उनके लिए आर्थिक रूप से संभव है या नहीं।
प्रदर्शन की चेतावनी के साथ-साथ PKRC के सूचना सचिव हसनैन जमील फरीदी ने सरकार से बातचीत की अपील की है। किसानों की मांगों में केवल कीमतें बढ़ाना ही नहीं, बल्कि निजी गेहूं खरीद को बंद करना और पासको (Passco) व प्रांतीय खाद्य विभागों के माध्यम से सरकारी खरीद को फिर से शुरू करना भी शामिल है, ताकि पूरी फसल की सरकारी खरीद सुनिश्चित हो सके।