पाकिस्तान में आटे की कीमतों में भारी उछाल, कृत्रिम कमी से जनता में बढ़ा आक्रोश

पाकिस्तान के पेशावर में आटे की कीमतों में अचानक आई तेजी ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। शहर में आटे की भारी किल्लत देखी जा रही है, जिससे न केवल रसोई का बजट बिगड़ा है, बल्कि लोगों में प्रशासन और व्यापारियों के खिलाफ गुस्सा भी बढ़ रहा है। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का आरोप है कि बाजार में आटे की यह कमी प्राकृतिक नहीं, बल्कि कुछ मुनाफाखोरों द्वारा जानबूझकर पैदा की गई एक 'कृत्रिम कमी' है।
बाजार की स्थिति इतनी खराब है कि 20 किलोग्राम मोटे आटे की एक बोरी की कीमत 3,300 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं, महीन आटे की 20 किलो की बोरी 3,120 रुपये और मोटे आटे की 80 किलो की बोरी 13,200 रुपये में बिक रही है। चोकर की 20 किलो की बोरी के दाम भी 1,480 रुपये तक जा पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि सरकारी सब्सिडी वाला आटा खुले बाजार से लगभग गायब हो चुका है, जिसका सीधा फायदा व्यावसायिक विक्रेताओं को मिल रहा है और वे कुछ ही दिनों में करोड़ों रुपये कमा रहे हैं।
तंदूरों में बढ़ी रोटियों की कीमतें, वजन में भी कटौती
आटे की बढ़ती कीमतों का सीधा असर तंदूरों पर पड़ा है। अब 50 ग्राम की एक रोटी, जो पहले 20 रुपये की थी, उसकी कीमत बढ़ाकर 30 रुपये कर दी गई है। शहर के प्रमुख बाजारों जैसे खैबर बाजार, अशरफ रोड और नमक मंडी में अब सिंगल रोटी बेचना बंद कर दिया गया है; ग्राहकों को अब 40 रुपये में डबल रोटी दी जा रही है। इसके अलावा, लोग यह शिकायत भी कर रहे हैं कि रोटियों का वजन लगातार कम किया जा रहा है।
इस संकट के बीच खाद्य विभाग का दावा है कि सब्सिडी वाला आटा अभी भी प्रांत में वितरित किया जा रहा है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले हफ्ते 1,611 डीलरों के माध्यम से आधिकारिक दरों पर 4,17,168 बोरियां supplied की गईं, जिनमें पेशावर डिवीजन को 1,01,955 बोरियां मिलीं। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कानून प्रवर्तन एजेंसियां अब शहर के बड़े डीलरों और आटे के गोदामों की निगरानी कर रही हैं ताकि जमाखोरी को रोका जा सके। नागरिकों ने पेशावर प्रशासन से मांग की है कि वह तुरंत हस्तक्षेप करे और रोटियों के वजन व कीमतों के निर्धारित मानकों को सख्ती से लागू करे।