Pakistan Hospital Fire: अस्पताल में लगी भीषण आग में 14 मासूम बच्चों की मौत, प्रधानमंत्री ने 8 अधिकारियों को किया सस्पेंड

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) के मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल वार्ड में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। इस अस्पताल के तीसरे फ्लोर पर बने नर्सरी वार्ड में बुधवार, 26 अगस्त 2026 को सुबह 6:30 बजे अचानक भयानक आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि महज दो मिनट के भीतर पूरी यूनिट को अपनी चपेट में ले लिया। इस भीषण हादसे में 14 नौनिहाल बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई, जिससे पूरे देश में शोक और गुस्से का माहौल है।
प्रधानमंत्री का सख्त एक्शन और जांच के आदेश
इस बड़े हादसे के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कड़ा रुख अपनाया। शनिवार, 29 अगस्त 2026 और रविवार, 30 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री ने आपराधिक लापरवाही बरतने के आरोप में कुल आठ अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड कर दिया और उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया। प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि बच्चों की जान से खेलने वाले इन लापरवाह लोगों को किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी।
सस्पेंड किए गए अधिकारियों में अस्पताल के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डॉ. इमरान सिकंदर, संयुक्त कार्यकारी निदेशक डॉ. मुताहिर शाह और चौधरी डॉ. ओवैस अली शाह, नवजात शिशु विभाग की प्रमुख प्रोफेसर डॉ. सदिया रियाज, सीनियर रजिस्ट्रार डॉ. नगमा, डॉ. नौशीला अमजद, सुरक्षा सहायक निदेशक मोहम्मद उस्मान और कैपिटल डेवलपमेंट अथॉरिटी की आपातकालीन सेवाओं के महानिदेशक डॉ. अब्दुल रहमान शामिल हैं। इसके अलावा अस्पताल की सुरक्षा संभालने वाली प्राइवेट कंपनी के अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जा रही है।
जांच रिपोर्ट में सामने आई भारी सुरक्षा खामियां
इस दर्दनाक हादसे की जांच के लिए सेवानिवृत्त वरिष्ठ सिविल सेवक शाहिद खान की अध्यक्षता में एक आधिकारिक जांच कमेटी बनाई गई थी। शुरुआती अंतरिम जांच रिपोर्ट में अस्पताल की घोर लापरवाही और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने की बात सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस नर्सरी वार्ड में बच्चे थे वहां न तो फायर अलार्म लगा था और न ही स्प्रिंकलर सिस्टम मौजूद था। अस्पताल के पास कुल 13 मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) थीं, जिनमें से केवल दो आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए थीं।
घटना के वक्त वार्ड में कोई भी सीनियर सुपरवाइज़र मौजूद नहीं था। उस समय ड्यूटी पर सिर्फ दो नर्स, एक महिला सुरक्षा गार्ड और एक हाउस ऑफिसर ही मौजूद थे। जब आग लगी तो उसके छह मिनट बाद आपातकालीन सेवाओं को फोन किया गया और फोन करने के पूरे 15 मिनट बाद दमकल और बचाव दल की गाड़ी मौके पर पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
मुआवजा और आगे की कार्रवाई
संघीय स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमल ने शुरुआती तौर पर एयर कंडीशनर में शॉर्ट सर्किट से चिंगारी निकलने की आशंका जताई थी, हालांकि आग लगने के असली कारणों की अभी आधिकारिक जांच चल रही है। देश के राष्ट्रपति आसिफ अली जर्दारी ने इस पर गहरा दुख जताया और इसे एक अपूरणीय क्षति बताया। इसके अलावा, यूनिसेफ (UNICEF) ने भी स्वास्थ्य केंद्रों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की तुरंत समीक्षा करने की अपील की है।
सरकार की तरफ से इस हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक बच्चे के परिवार को 5 लाख पाकिस्तानी रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया गया है। वहीं, आग के बीच एक बच्चे की जान बचाने वाली साहसी नर्स razia noreen को उनकी बहादुरी के लिए 'सितारा-ए-खिदमत' से सम्मानित किया जाएगा। इस घटना के बाद पंजाब सरकार ने भी अपने सभी अस्पतालों में तुरंत सुरक्षा ऑडिट कराने का सख्त आदेश जारी कर दिया है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।