Pakistan Hospital Fire: अस्पताल में लगी भीषण आग, नर्स की बहादुरी से बची एक बच्चे की जान.

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के एक बड़े अस्पताल में हुए भयानक हादसे के बाद वहां की एक नर्स की बहादुरी की चर्चा हर तरफ हो रही है। इस दर्दनाक घटना में कई मासूम बच्चों की जान चली गई, लेकिन एक नर्स ने अपनी जान पर खेलकर एक नवजात शिशु को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना के बाद से अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं और सरकार ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
अस्पताल के आईसीयू में मची अफरातफरी
यह घटना 26 अगस्त 2026 को सुबह के समय पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल के नर्सरी वार्ड में घटी। सुबह लगभग 6:38 बजे अचानक वार्ड में आग लग गई, जिसने कुछ ही पलों में विकराल रूप ले लिया। आग इतनी भयानक थी कि देखते ही देखते पूरा वार्ड घने धुएं से भर गया। इस दर्दनाक हादसे में 14 नवजात बच्चों की मौत हो गई, जिससे पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।
नर्स रजिया की वीरता
जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय वार्ड में तैनात 38 वर्षीय नर्स Razia Noreen ने अपनी जान की परवाह न करते हुए आग के बीच छलांग लगा दी। सामने आए सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक, उन्होंने सुबह 6:38:56 बजे वार्ड में प्रवेश किया और सिर्फ आठ सेकंड के भीतर, यानी 6:39 बजे से पहले, एक 1,050 ग्राम के ऑक्सीजन पर निर्भर नवजात शिशु को गोद में लेकर बाहर आ गईं। उन्होंने तुरंत उस बच्चे को डॉक्टर Abdul Rehman को सौंप दिया। इसके बाद जब उन्होंने डॉक्टर Rimsha और नर्स Nasreen के साथ दोबारा अंदर जाने की कोशिश की, तो एक जोरदार धमाका हुआ, तेज गर्मी और बिजली गुल होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। नर्स रज़िया ने बाद में बताया कि वह सभी बच्चों को बचाना चाहती थीं, लेकिन वह सिर्फ एक ही बच्चे की जान बचा पाईं। इस हादसे के बाद से वह गंभीर मानसिक तनाव और नींद की कमी से जूझ रही हैं।
प्रधानमंत्री ने की घोषणा और अधिकारियों पर कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने 3 सितंबर 2026 को इस्लामाबाद में नर्स रजिया नूरी से मुलाकात की और उनकी बहादुरी की सराहना करते हुए उन्हें देश की बेटी बताया। प्रधानमंत्री ने उन्हें 10 मिलियन पाकिस्तानी रुपये यानी लगभग 36,000 अमेरिकी डॉलर का पुरस्कार देने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान Sitara-i-Khidmat से सम्मानित किया जाएगा। सरकार ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए 29 अगस्त 2026 को आठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया और उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू कर दी। संघीय स्वास्थ्य मंत्री Mustafa Kamal ने मरने वालों की संख्या की पुष्टि की है, जबकि स्वास्थ्य सचिव Aslam Ghauri को उनके पद से हटा दिया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था की हो रही जांच
राष्ट्रपति Asif Ali Zardari ने इस घटना पर गहरा दुख जताया और इसे अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने तुरंत अस्पताल की आग से जुड़ी सुरक्षा प्रणालियों की समीक्षा करने का आदेश दिया है। सेवानिवृत्त संघीय सचिव Shahid Khan की अध्यक्षता में बनी जांच कमेटी ने 28 अगस्त 2026 को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें सामने आया कि अस्पताल में फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम नहीं लगे थे। जांच अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि आग एयर कंडीशनर में खराबी, इन्क्यूबेटर या फिर शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि घटना के समय आपातकालीन ट्रेनिंग और स्टाफ की भारी कमी थी। सूचना मिलने पर आपातकालीन सेवाओं को पहुंचने में देरी हुई, जिससे स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई।