मानवाधिकार वकीलों को 10 साल की जेल, बलोच वॉयस फॉर जस्टिस ने की निंदा

इस्लामाबाद की अदालत ने मानवाधिकार वकील इमान मज़ारी और हादी अली चाथा को 10 साल की सजा सुनाई है, जिसकी कड़ी निंदा हुई है।

Gautam Sahu30 October 20262 min read0 viewsWorld
मानवाधिकार वकीलों को 10 साल की जेल, बलोच वॉयस फॉर जस्टिस ने की निंदा

बलूचिस्तान (पाकिस्तान): बलोच वॉयस फॉर जस्टिस ने मानवाधिकार वकील इमान मज़ारी और हादी अली चाथा को इस्लामाबाद की एक आतंकवाद विरोधी अदालत द्वारा सुनाई गई 10 साल की जेल की सजा की कड़े शब्दों में निंदा की है। संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान जारी कर पाकिस्तान में न्यायिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा करने की आजादी पर गंभीर चिंता जताई है।

बलोच वॉयस फॉर जस्टिस ने कहा कि पाकिस्तान की न्यायिक प्रणाली न्याय देने के बजाय असहमति को दबाने का जरिया बनती जा रही है। संगठन के मुताबिक, इन दोनों वकीलों ने जबरन गायब किए गए लोगों के पीड़ितों का प्रतिनिधित्व किया था और बलोच व पश्तून कार्यकर्ताओं के साथ एकजुटता जताई थी। ऐसे में उन्हें सजा देना देश की न्यायिक प्रणाली की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

बयान में कहा गया है कि मानवाधिकारों की वकालत और कानूनी काम करने वाले वकीलों पर आतंकवाद से संबंधित आरोप लगाना मौलिक स्वतंत्रता और कानूनी पेशेवरों के संरक्षण को कमजोर करता है। संगठन ने एमनेस्टी इंटरनेशनल का हवाला देते हुए बताया कि इमान मज़ारी और हादी अली चाथा को निष्पक्ष और खुले परीक्षण के उनके मौलिक अधिकार से वंचित रखा गया।

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जानकारी के मुताबिक, शुरुआत में इन वकीलों को अदालत की कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। बाद में उन्हें जेल परिसर के भीतर आयोजित सुनवाई में शामिल किया गया, जहां उन्हें पिंजरे जैसी घेराबंदी के पीछे रखा गया था। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इन सजाओं को पाकिस्तान की न्याय प्रणाली पर एक गंभीर आरोप बताया है और दोनों वकीलों की तत्काल रिहाई व सभी आरोपों को वापस लेने की मांग की है।

बलोच वॉयस फॉर जस्टिस ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की न्यायपालिका लगातार शक्तिहीन होती जा रही है और अदालत के फैसले स्वतंत्र होने के बजाय शक्तिशाली सैन्य हलकों से प्रभावित लग रहे हैं। संगठन का दावा है कि जज केवल अन्य जगहों पर लिए गए फैसलों का समर्थन कर रहे हैं, जिससे कानून के शासन और न्यायिक स्वतंत्रता का क्षरण हो रहा है।

संगठन ने तर्क दिया कि ऐसी न्यायिक प्रणाली जिसमें मानवाधिकारों की वकालत को अपराध और असहमति को आतंकवाद के रूप में पेश किया जाता है, वह न्याय के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है।

इस मामले में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, संयुक्त राष्ट्र के संबंधित निकायों और वैश्विक कानूनी समुदाय से अपील की गई है कि वे इमान मज़ारी और हादी अली चाथा के मामलों की समीक्षा करें। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय हितधारकों से इन वकीलों की रिहाई के लिए आवाज उठाने और पाकिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने तथा न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया है।

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