पाकिस्तान में दो मानवाधिकार वकीलों को 10 साल की सजा, एमनेस्टी ने जताया विरोध

पाकिस्तान की एंटी-टेरर कोर्ट ने दो मानवाधिकार वकीलों को 10 साल की सजा सुनाई है, जिसे एमनेस्टी इंटरनेशनल ने राजनीतिक प्रतिशोध बताया है।

Gautam Sahu7 November 20262 min read0 viewsWorld
पाकिस्तान में दो मानवाधिकार वकीलों को 10 साल की सजा, एमनेस्टी ने जताया विरोध

इस्लामाबाद: एमनेस्टी इंटरनेशनल के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय नागरिक समाज संगठनों ने पाकिस्तान के दो प्रमुख मानवाधिकार वकीलों, ईमान जैनब मजारी-हाज़िर और हादी अली चत्था की सजा की कड़ी निंदा की है। इन संगठनों ने इस फैसले को राजनीतिक रूप से प्रेरित उत्पीड़न और आपराधिक न्याय प्रणाली के दुरुपयोग का हिस्सा बताया है।

इस्लामाबाद की एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने 29 अक्टूबर को अपना फैसला सुनाया था। कोर्ट ने दोनों वकीलों को एंटी-टेररिज्म एक्ट (ATA) 1997 के तहत 10 साल और पाकिस्तान दंड संहिता (PPC) के तहत तीन साल की जेल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उन पर कुल 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।

यह मामला अक्टूबर 2024 की एक घटना से जुड़ा है। आरोप है कि इंग्लैंड क्रिकेट टीम के दौरे के दौरान इस्लामाबाद की एक सड़क पर सुरक्षा बैरियर हटाए गए थे, जिसमें इन वकीलों की भूमिका थी। इसी आधार पर उन्हें ATA की धारा 7(h) और PPC की धारा 186 और 353 के तहत दोषी ठहराया गया है।

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संगठनों ने इस मुकदमे की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि रावलपिंडी की अडियाला जेल के भीतर चलाया गया यह ट्रायल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं था। रिपोर्टों के मुताबिक, वकीलों को पिंजरे जैसी कोर्ट संरचना में रखा गया था, जिससे उनके कानूनी प्रतिनिधियों से बात करना मुश्किल हो गया। बचाव पक्ष की टीम को सबूतों को चुनौती देने और वकीलों तक पहुंचने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

बयानों में इस बात की भी आलोचना की गई कि अदालत ने अपना फैसला तब सुनाया जब 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही पर रोक लगाने और केस ट्रांसफर करने की याचिका दायर की गई थी।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि इन सजाओं को उन कानूनी मामलों की कड़ी के रूप में देखा जाना चाहिए जो इन वकीलों को निशाना बनाने के लिए किए गए हैं। इससे पहले 17 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी और इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम अधिनियम (PECA) के तहत उनकी 17 साल की सजा निलंबित की थी। वह मामला सोशल मीडिया पर पाकिस्तान सेना की आलोचना और बलूच व पश्तून कार्यकर्ताओं के समर्थन से जुड़ा था, लेकिन जमानत मिलने के उसी दिन उन्हें आतंकवाद विरोधी कानून के एक अन्य मामले में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया।

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