पाकिस्तान में महंगाई का संकट जारी, ईंधन और बिजली ने बढ़ाई मुश्किलें

Kush Singh3 October 20263 min read0 viewsFinance
पाकिस्तान में महंगाई का संकट जारी, ईंधन और बिजली ने बढ़ाई मुश्किलें

आम जनता की जेब पर बोझ लगातार भारी होता जा रहा है। पाकिस्तान में महंगाई एक बार फिर से दो अंकों में बनी हुई है, जिससे आम नागरिकों का बजट बुरी तरह से चरमरा गया है। हालांकि खाद्य पदार्थों की कीमतों में कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन बिजली और ईंधन के आसमान छूते दामों ने राहत के इस असर को बेअसर कर दिया है। आंकड़े बताते हैं कि स्थिति अभी भी सरकार के अनुमानों से ऊपर चल रही है।

सितंबर में क्या रहे महंगाई के आंकड़े?

पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में देश की खुदरा महंगाई दर 10.3 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे पहले अगस्त के महीने में यह आंकड़ा 11.1 प्रतिशत पर था। महीने-दर-महीने आधार पर देखें तो सितंबर में उपभोक्ता कीमतों में 1.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में महंगाई का असर साफ तौर पर देखा जा रहा है। शहरी इलाकों में महंगाई 10.1 प्रतिशत रही, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह थोड़ी अधिक यानी 10.5 प्रतिशत दर्ज की गई।

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ईंधन और बिजली ने बढ़ाई आम आदमी की मुसीबत

एक तरफ जहां खाद्य महंगाई में कुछ गिरावट आई है, वहीं ऊर्जा क्षेत्र की महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है।

  • बिजली के दाम: पिछले साल की तुलना में बिजली की कीमतों में 33 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है।
  • पेट्रोल की कीमतें: पेट्रोल के दाम एक साल पहले के मुकाबले 39 प्रतिशत अधिक चल रहे हैं।
  • परिवहन सेवाएं: ट्रांसपोर्टेशन की लागत में भी सालाना आधार पर 30 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
  • ऊर्जा महंगाई: शहरी क्षेत्रों में ऊर्जा से जुड़ी महंगाई 11.5 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 13.1 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

खाद्य बाजार का मिला-जुला हाल

खाने-पीने की चीजों के मोर्चे पर स्थिति थोड़ी मिली-जुली नजर आई। शहरों में खाद्य महंगाई गिरकर 8.1 प्रतिशत और गांवों में 7.7 प्रतिशत पर आ गई। हालांकि, कुछ प्रमुख खाद्य पदार्थों के दाम अभी भी बहुत ज्यादा बने हुए हैं:

  1. प्याज की कीमतों में सालाना आधार पर 125 प्रतिशत की驚नजनक तेजी आई है।
  2. गेहूं की कीमत में 41 प्रतिशत और आटे के दाम में 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
  3. दूसरी ओर, आलू, चिकन, अंडे और चीनी जैसी कुछ चीजों के दामों में गिरावट भी दर्ज की गई है।

आगे क्या हैं अनुमान?

सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) को बताया है कि अगर वैश्विक बाजार में हालात सामान्य रहते हैं और ब्रेंट क्रूड का भाव औसतन 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है, तो पूरे वित्त वर्ष के दौरान औसत महंगाई 7.5 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। हालांकि, यदि दिसंबर तक कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के करीब बनी रहीं, तो वार्षिक महंगाई 8.2 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दिसंबर तक कीमतों में यह दबाव बना रह सकता है, जिसके बाद ही इसमें धीरे-धीरे नरमी आने की उम्मीद है। फिलहाल तो बिजली और ईंधन के बढ़ते खर्चों के कारण पाकिस्तान के आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं।

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