पाकिस्तान में पत्रकारों की सुरक्षा के कानून कागजों तक सीमित, संसाधनों की कमी से कमीशन नहीं कर पा रहे काम
फ्रीडम नेटवर्क की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए बने कानून और कमीशन संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं।

इस्लामाबाद (पाकिस्तान): पाकिस्तान में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनी प्रावधान अब तक बेअसर साबित हो रहे हैं। मीडिया वॉचडॉग फ्रीडम नेटवर्क की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक संघीय और प्रांतीय सुरक्षा कमीशनों को अधिक अधिकार, पर्याप्त बजट और शिकायत दर्ज करने के आसान तरीके नहीं मिलते, तब तक ये कानून प्रभावी नहीं होंगे।
इन्टरनेशनल मीडिया सपोर्ट (IMS) के सहयोग से तैयार की गई इस रिपोर्ट का नाम 'फ्रॉम सेफ्टी ऑन पेपर टू सेफ्टी इन प्रैक्टिस' है। इसमें संघीय और सिंध सरकार द्वारा बनाए गए पत्रकार सुरक्षा कमीशनों के कामकाज की जांच की गई है। शोधकर्ताओं मिनाहिल शाहब और अदनान रहमत ने सिंध के ग्रामीण जिलों सहित करीब 40 पत्रकारों से इंटरव्यू और ऑनलाइन सर्वे के जरिए जानकारी जुटाई।
पाकिस्तान की संसद ने 2022 में पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर दो कानून बनाए थे। इसके बाद संघीय और सिंध सरकार ने इन कानूनों को लागू करने के लिए कमीशन गठित किए। लेकिन सर्वे में पाया गया कि कानून और लोगों की जागरूकता के बीच बड़ा अंतर है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सिंध के 70 प्रतिशत उत्तरदाताओं को वहां के पत्रकार सुरक्षा कानून की जानकारी थी, लेकिन 65 प्रतिशत लोग इस बात से अनजान थे कि कमीशन का ऑफिस कहां है या उसकी वेबसाइट और शिकायत प्रक्रिया का उपयोग कैसे करें। वहीं, 2021 के बाद से 65 प्रतिशत पत्रकारों ने पेशेवर खतरों या हस्तक्षेप का सामना किया है।
प्रशासनिक कमियों को लेकर संघीय कमीशन के चेयरमैन कमालुद्दीन टीपू ने स्टाफ की कमी, बजट की सीमाओं और प्रशासनिक दिक्कतों का जिक्र किया। रिपोर्ट में जोर दिया गया कि सिर्फ कमीशन का अस्तित्व होना सुरक्षा की गारंटी नहीं है, जब तक कि वहां पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन न हों।
सिंध में कमीशन ने अपना ऑफिस बनाया है और पुलिस व मीडिया संगठनों के साथ मिलकर शिकायतों पर काम किया है। हालांकि, यूनियन प्रतिनिधियों और गैर-सरकारी सदस्यों ने प्रतिक्रिया में देरी, कराची के बाहर सीमित पहुंच और पुलिस फीडबैक पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर चिंता जताई है।