सेंसरशिप और कानूनी उत्पीड़न के खिलाफ पाकिस्तान में पत्रकारों ने बनाया संयुक्त गठबंधन

पाकिस्तान में सेंसरशिप और कानूनी उत्पीड़न के खिलाफ पत्रकारों और नागरिक समाज ने एक संयुक्त गठबंधन बनाया है।

Gautam Sahu27 October 20262 min read0 viewsWorld
सेंसरशिप और कानूनी उत्पीड़न के खिलाफ पाकिस्तान में पत्रकारों ने बनाया संयुक्त गठबंधन

इस्लामाबाद (पाकिस्तान): पाकिस्तान में सेंसरशिप, कानूनी डराने-धमकाने और डिजिटल संचार पर पाबंदियों के बीच प्रेस की आजादी बचाने के लिए वरिष्ठ पत्रकारों, मीडिया यूनियनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने एक संयुक्त गठबंधन बनाया है। जियो न्यूज के मुताबिक, यह फैसला मुनिज़े जहांगीर के संचालन और अनुभवी पत्रकार नासिर ज़ैदी की अध्यक्षता में हुई एक गोलमेज बैठक के दौरान लिया गया।

बैठक में शामिल लोगों ने अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा और नागरिक अधिकारों के दायरे को बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयासों की मांग की। वक्ताओं ने सुझाव दिया कि प्रेस स्वतंत्रता के उल्लंघन के मामलों का दस्तावेजीकरण किया जाए और उन राजनीतिक दलों की भूमिका की जांच हो जिन्होंने प्रतिबंधात्मक कानून पारित किए हैं।

प्रसिद्ध एंकर हामिद मीर ने प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट (PECA) के तहत पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मामलों का जिक्र किया। उन्होंने अभिव्यक्ति की आजादी पर लगी पाबंदियों का विवरण देने के लिए एक श्वेत पत्र (white paper) तैयार करने का प्रस्ताव रखा। वहीं, अनुभवी पत्रकार मुजीबुर रहमान शामी ने तर्क दिया कि पाकिस्तान की समस्या केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मौजूदा कानूनों का प्रभावी ढंग से लागू न होना भी एक बड़ी चुनौती है।

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नजम सेठी ने मौलिक अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहने के लिए राजनीतिक दलों की आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि सेल्फ-सेंसरशिप और व्यावसायिक दबावों ने स्वतंत्र पत्रकारिता को कमजोर कर दिया है। असमा शिराज़ी ने महिला पत्रकारों को निशाना बनाने वाले ऑनलाइन उत्पीड़न का मुद्दा उठाया, जबकि आरिफा नूर ने मीडिया कर्मियों के खिलाफ होने वाले दुर्व्यवहार और सेंसरशिप को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने की जरूरत बताई।

बलूचिस्तान, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब, पीओजेके और पीओजीबी के पत्रकारों ने सुरक्षा खतरों और आर्थिक दबावों के बारे में बताया। खैबर पख्तूनख्वा के पत्रकार नेता नासिर हुसैन ने कहा कि 9/11 के बाद से प्रांत में 30 से अधिक पत्रकारों की हत्या हो चुकी है और 2025 में 22 पत्रकारों को धमकियां मिली हैं। उन्होंने बताया कि प्रांतीय विधानसभा द्वारा प्रस्तावित एक प्रतिबंधात्मक कानून को विरोध के बाद वापस लेना पड़ा था।

पूर्व सीनेटर फरहतुल्लाह बाबर ने गठबंधन से राजनीतिक दलों के साथ सीधे संवाद करने और निगरानी व व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग के खिलाफ सुरक्षा की मांग करने का आग्रह किया। इसके अलावा, पत्रकारों के प्रतिनिधियों ने PECA संशोधनों, मानहानि कानूनों और वेतन में देरी की आलोचना करते हुए कहा कि इन कदमों ने प्रेस की स्वतंत्रता को और कमजोर किया है।

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