Pakistan के Kohat में मस्जिद पर आत्मघाती हमला, जुमे की नमाज़ के दौरान 27 लोगों की मौत और 75 घायल.

पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट जिले में शुक्रवार को एक बड़ा आतंकी हमला हुआ। एक पुलिस परिसर के अंदर बनी मस्जिद को निशाना बनाकर किए गए आत्मघाती धमाके में कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई और 75 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह दर्दनाक घटना तब घटी जब पुलिस अधिकारी और उनके परिवार के लोग जुमे की नमाज़ अदा करने के लिए मस्जिद में इकट्ठा हुए थे। हमले की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि धमाका इतना जबरदस्त था कि आसपास का इलाका दहल उठा और चारों तरफ अफरातफरी मच गई।
विस्फोट के बाद हथियारों से लैस हमलावरों ने की घुसने की कोशिश
विस्फोट के तुरंत बाद हथियारों से लैस कुछ अन्य हमलावरों ने परिसर में जबरन घुसने की कोशिश की, जिससे सुरक्षा बलों के साथ उनकी भीषण गोलीबारी शुरू हो गई। प्रांतीय पुलिस प्रमुख जुल्फिकार हमीद ने मीडिया को जानकारी दी कि हमलावर ने विस्फोटकों से लदी गाड़ी को सीधे मस्जिद और पुलिस कंपाउंड के पास लाकर टकरा दिया था। कोहाट जिला अस्पताल के शीर्ष अधिकारी ताहिर अली शाह और जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नासिर हुसैन ने हताहतों की पुष्टि करते हुए बताया कि कई घायलों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है, जिससे मरने वालों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है।
हमले की जिम्मेदारी और सुरक्षा बलों की कार्रवाई
अलजजीरा के पत्रकार कमल हैदर ने इस्लामाबाद से रिपोर्टिंग करते हुए बताया कि इस कायराना हमले की जिम्मेदारी इत्तेहादुल मुजाहिदीन संगठन ने ली है। यह संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP का एक धड़ा है जो कमांडर हाफिज गुल बहादुर से जुड़ा हुआ है। हालांकि, मुख्य टीपीपी संगठन ने इस ऑपरेशन से खुद को अलग कर लिया है और हमले की बात से इनकार किया है। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में सभी सात हमलावर मारे गए, जिनमें विस्फोट को अंजाम देने वाला और गोलीबारी करने वाले आतंकी शामिल थे। यह खूनी संघर्ष उस घटना के ठीक एक दिन बाद हुआ जब हांगू जिले में एक अलग सड़क किनारे हुए बम धमाके में छह सैनिक मारे गए थे। इससे पहले 15 से 17 सितंबर के बीच सुरक्षा बलों ने अपने अभियानों में 10 संदिग्ध आतंकवादियों को ढेर किया था.
अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा
इस भीषण हमले के बाद देश के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कड़ी निंदा की है। राष्ट्रपति जरदारी ने देश की सुरक्षा और शांति सुनिश्चित करने के लिए 'फितना अल-खवारिज' को पूरी तरह से खत्म करने की बात कही है। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने इस घटना को बेहद कायरतापूर्ण करार दिया है। देश के अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस हमले की पुरजोर आलोचना की गई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ-साथ सऊदी अरब, तुर्की और फलस्तीन राज्य के अधिकारियों ने भी औपचारिक रूप से अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया है और मलबे को हटाने के साथ-साथ तलाशी अभियान लगातार जारी रखा है। पाकिस्तान लगातार इस बात का आरोप लगा रहा है कि उसके क्षेत्र में बढ़ रही आतंकवादी गतिविधियों के पीछे अफगानिस्तान की जमीन पर मौजूद सुरक्षित ठिकाने हैं, हालांकि अफगान तालिबान की सरकार इन सभी दावों को सिरे से खारिज करती आई है।