पाकिस्तान में सेना का सबसे बड़ा बदलाव, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को मिली असीम शक्तियां.

पाकिस्तान की सेना में 1976 के बाद से अब तक का सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां देश की पूरी सैन्य ताकत को केंद्रीय रूप से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के हाथों में सौंप दिया गया है। इस बड़े बदलाव की जानकारी 5 सितंबर 2026 को सामने आई, जिसके तहत उन्हें आधिकारिक तौर पर चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के साथ-साथ चीफ ऑफ Defence Forces यानी CDF भी बना दिया गया है। इस पूरी व्यवस्था को कानूनी जामा पहनाने के लिए नेशनल एसेंबली ने Defence Forces of Pakistan Act, 2026 और नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट, 2010 में संशोधन को मंजूरी दी थी, जिसे राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 20 अगस्त 2026 को अपनी मंजूरी दी थी।
नई व्यवस्था और रक्षा मुख्यालय का गठन
इस नई व्यवस्था के तहत डिफेंस फोर्सेस हेडक्वार्टर यानी DFHQ का गठन किया गया है, जिसने पहले के चेयरमैन ऑफ द ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के पद की जगह ले ली है। अब फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के पास देश की थल सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों पर सीधा नियंत्रण आ गया है। उनका यह कार्यकाल पूरे पांच साल का तय किया गया है जो कम से कम 2030 तक चलने की उम्मीद है। इन नए कानूनों के जरिए उन्हें अधिकारियों की नियुक्ति, रिटायरमेंट और उन्हें सेवा से हटाने के मामले में बहुत बड़े अधिकार मिल गए हैं, जिसका इस्तेमाल वे अपनी मर्जी से कर सकेंगे।
परमाणु हथियारों और रणनीतिक कमान पर नियंत्रण
पाकिस्तान के परमाणु हथियारों और रणनीतिक संपत्तियों को भी इसी नई कमान के तहत एकजुट कर दिया गया है। अब कमांडर ऑफ द नेशनल स्ट्रेटेजिक कमांड यानी CNSC का पद केवल सेना के अधिकारी के लिए ही आरक्षित कर दिया गया है। इस पद पर जुलाई 2026 में जनरल सैयद आमेर रजा को नियुक्त किया गया था। सरकार और सैन्य अधिकारियों का ऐसा मानना है कि साल 2025 के मई महीने में भारत के साथ हुए छोटे संघर्ष के बाद, देश में युद्ध की तैयारियों को बेहतर करने और किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटने के लिए इन सुधारों को लाया गया है।
इस पूरे मामले को लेकर जानकारों और अधिकारियों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों जैसे जनरल नईम खालिद लोधी ने इस कदम को सेना की पुरानी कार्यप्रणाली और चेन ऑफ कमांड को दुरुस्त करने वाला बताया है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रखने वालों ने इसे एक सॉफ्ट तख्तापलट यानी सॉफ्ट कूप करार दिया है। उनका यह कहना है कि इस तरह के बदलावों से देश में नागरिक प्रशासन और सेना के बीच का संतुलन बिगड़ रहा है और नागरिक निगरानी कम होती जा रही है। इस बारे में अधिक जानकारी आप DD News की रिपोर्ट में देख सकते हैं।