संयुक्त राष्ट्र में उठा पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का मुद्दा, बाल विवाह पर जताई गई चिंता

Aanya28 September 20263 min read0 viewsWorld
संयुक्त राष्ट्र में उठा पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का मुद्दा, बाल विवाह पर जताई गई चिंता

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र के दौरान एक साइड इवेंट में पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों के साथ होने वाले जबरन और बाल विवाह का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया है। इस दौरान वक्ताओं ने इन घटनाओं के कारण बच्चियों के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और उनकी गरिमा पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। यह जानकारी यूएन इकोसोक से मान्यता प्राप्त मानवाधिकार संगठन ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस द्वारा साझा की गई है।

पाकिस्तान में बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन

मानवाधिकार रक्षक और ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान के अध्यक्ष नवीन वाल्टर ने बाल अधिकारों के उल्लंघन से प्रभावित बच्चों की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कम उम्र में शादी के बंधन में बंधने वाले बच्चों को किन-किन बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में यूनिसेफ द्वारा पाकिस्तान के संबंध में जारी किए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि देश में 9 करोड़ महिलाएं, बच्चे और बच्चियां बाल अधिकारों के हनन से प्रभावित हैं। इनमें से लगभग 48 लाख बच्चियों की उम्र 15 साल से भी कम है।

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नवीन वाल्टर ने आगे कहा कि बाल विवाह के कारण बच्चियों के जीवन पर बहुत गंभीर परिणाम सामने आते हैं, जिसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और सेहत पर पड़ता है। उन्होंने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि गर्भावस्था के दौरान लाखों बच्चों की जान चली जाती है और जिन बच्चियों की कम उम्र में शादी हो जाती है, उनमें से 30 प्रतिशत से भी कम को बुनियादी शिक्षा मिल पाती है।

सिंध प्रांत की डरावनी स्थिति और स्वास्थ्य जोखिम

सिंध की महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ने वाली कार्यकर्ता डॉ. शगुफ्ता कंध्रो ने पाकिस्तान के सिंध प्रांत के हालात पर खुलकर बात की। उन्होंने कम उम्र में ब्याही जाने वाली लड़कियों की कमजोरी और उनके स्वास्थ्य तथा भविष्य पर पड़ने वाले बुरे असर के बारे में बताया। ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, नेशनल कमीशन ऑन द राइट्स ऑफ द चाइल्ड की रिपोर्ट में यह सामने आया है कि 10 से 17 वर्ष की आयु के बीच के 84,000 बच्चे शादीशुदा हैं, विधवा हैं या फिर अलग हो चुके हैं। इनमें से कई बच्चियों ने अपनी स्कूली पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी है और वे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं।

डॉ. शगुफ्ता कंध्रो ने बताया कि सिंध प्रांत में हर पांच में से एक यानी 21 प्रतिशत युवा महिलाओं की शादी 18 साल की उम्र से पहले ही कर दी जाती है। उन्होंने कम उम्र की गर्भावस्था और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उनके अनुसार, पाकिस्तान में 15 से 19 वर्ष की आयु की लड़कियों में एक साल के दौरान अनुमानित 61,000 गर्भधारण के मामले सामने आते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस आयु वर्ग की केवल 44 प्रतिशत गर्भवती लड़कियों को ही गर्भावस्था के दौरान चार या उससे अधिक बार स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिल पाती है।

एनीमिया और अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग

सिंध प्रांत में लड़कियों के बीच खून की कमी यानी एनीमिया की समस्या पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि वहां की 61.9 प्रतिशत लड़कियां एनीमिया से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरे पाकिस्तान के सभी प्रांतों में सबसे ज्यादा है। कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को और मजबूत करने की मांग की। उन्होंने जेंडर आधारित हिंसा के रूप में हो रहे बाल और जबरन विवाह के खिलाफ बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय कदम उठाने की जोरदार अपील की ताकि मासूम बच्चियों के भविष्य को बचाया जा सके।

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