पाकिस्तान की 38% से ज़्यादा आबादी भयंकर गरीबी में, करीब 10 करोड़ लोग जी रहे नरक की जिंदगी.

Gautam Sahu13 October 20262 min read0 viewsWorld
पाकिस्तान की 38% से ज़्यादा आबादी भयंकर गरीबी में, करीब 10 करोड़ लोग जी रहे नरक की जिंदगी.

पाकिस्तान: संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (OPHI) की ताज़ा ग्लोबल मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (MPI) 2026 रिपोर्ट में पाकिस्तान की हालत पर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की 38.3% से ज़्यादा आबादी बहुआयामी गरीबी की चपेट में है, यानी स्वास्थ्य, शिक्षा और रहन-सहन के कई मोर्चों पर एक साथ अभाव झेल रही है।

करीब 10 करोड़ लोग प्रभावित

रिपोर्ट में 2024 की जनसंख्या अनुमानों को आधार बनाया गया है। इसके हिसाब से पाकिस्तान में करीब 10 करोड़ लोग विकास के गंभीर अंतरों से जूझ रहे हैं। जो लोग अभी गरीबी की श्रेणी में नहीं आते, उनमें से भी 12.9% आबादी को ऐसे अभावों का खतरा बताया गया है, यानी वे कभी भी इसी दायरे में आ सकते हैं।

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गरीब माने गए लोगों में अभाव की तीव्रता 51.7% है। रिपोर्ट के अनुसार इस संकट में सबसे बड़ा योगदान शिक्षा का है। पाकिस्तान की 21.5% आबादी गंभीर शैक्षिक गरीबी का सामना कर रही है।

आय नहीं, कई पैमानों पर होता है आकलन

MPI की खासियत यह है कि इसमें सिर्फ कमाई को पैमाना नहीं बनाया जाता। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर से जुड़े दस अलग-अलग संकेतकों को देखा जाता है। किसी व्यक्ति को गरीब तब माना जाता है, जब उसके अभावों का भारित स्कोर कुल संकेतकों के कम से कम एक-तिहाई तक पहुंच जाए।

पड़ोसी देशों से तुलना

रिपोर्ट में पाकिस्तान की तुलना उसके पड़ोसी देशों से भी की गई है। पाकिस्तान का 38.3% का आंकड़ा बांग्लादेश के 14.9% और भारत के 16.4% से काफी ऊपर है। हालांकि रिपोर्ट यह भी साफ करती है कि ये आंकड़े अलग-अलग वर्षों के सर्वेक्षणों पर आधारित हैं, इसलिए इन्हें सीधे एक ही पैमाने पर रखकर देखना सही नहीं होगा।

दुनिया भर में बढ़ा आंकड़ा

पूरी दुनिया के स्तर पर भी तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक बहुआयामी गरीबी में जी रहे लोगों की संख्या 1.2 अरब तक पहुंच गई है, जो पिछले 15 वर्षों में पहली बढ़ोतरी है। UNDP के प्रशासक एलेक्स डी क्रू ने इस बढ़ोतरी को एक चेतावनी के रूप में देखा है। उन्होंने भूख, साफ पानी की कमी और सीमित बिजली जैसी समस्याओं के आपस में जुड़े होने की बात कही, जिनसे 61.7 करोड़ बच्चे प्रभावित हैं।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि दुनिया के गरीबों में से 83% लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं।

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