पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें बढ़ीं, लेकिन गरीबों के लिए जारी रहेगी विशेष सब्सिडी योजना

Gautam Sahu7 October 20262 min read0 viewsWorld
पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें बढ़ीं, लेकिन गरीबों के लिए जारी रहेगी विशेष सब्सिडी योजना

पाकिस्तान में महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों के लिए एक तरफ पेट्रोल की कीमतों में इजाफा हुआ है, तो दूसरी तरफ सरकार ने अपनी 'प्रधानमंत्री विशेष राहत योजना' के जरिए राहत देने की कोशिश की है। हाल ही में ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) ने पेट्रोल की कीमतों में 1.19 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है, जिससे अब इसकी कीमत 394.83 रुपये हो गई है। हालांकि, हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में 1.91 रुपये की मामूली गिरावट आई है, जो अब 395.85 रुपये प्रति लीटर है।

बता दें कि इस साल अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े युद्ध के बाद से ईंधन की कीमतों में 50% से अधिक का उछाल आया है, जिसने आम जनता की कमर तोड़ दी है। इसी दबाव को कम करने के लिए सितंबर 2026 में शुरू की गई इस सब्सिडी योजना का उद्देश्य उन 90 लाख से अधिक निम्न-आय वाले नागरिकों की मदद करना है, जो अपनी दैनिक जरूरतों के लिए छोटे वाहनों पर निर्भर हैं।

किसे कितना मिल रहा है फायदा?

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सरकार ने इस सब्सिडी को बहुत ही टारगेटेड रखा है ताकि मदद सही लोगों तक पहुंचे। इस योजना के तहत मोटरसाइकिल, रिक्शा, किंगकी और 800cc तक की कारों के मालिकों को राहत दी जा रही है। मोटरसाइकिल और थ्री-व्हीलर चलाने वालों को हर हफ्ते 500 रुपये की छूट मिल रही है, जो महीने में अधिकतम 2,000 रुपये तक होती है। वहीं, 800cc तक की कार मालिकों को हर 10 दिन में 10 लीटर तक के पेट्रोल पर 100 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी दी जा रही है, जिससे उन्हें महीने में अधिकतम 3,000 रुपये की बचत हो रही है। इसके अलावा, छोटे किसानों को 1,500 रुपये प्रति एकड़ की एकमुश्त सहायता भी प्रदान की जा रही है।

इस योजना का लाभ उठाने के लिए वाहनों का 1 जनवरी 2006 के बाद पंजीकृत होना जरूरी है। पात्र लोग अपने CNIC, रजिस्टर्ड सिम और वाहन के रिकॉर्ड को लिंक करके 9771 पर SMS के जरिए आवेदन कर सकते हैं। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक और आईटी मंत्री शाजा फातिमा ख्वाजा ने इस पहल को तकनीक का बेहतरीन इस्तेमाल बताते हुए कहा कि अब तक 95 लाख से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा चुके हैं।

इस पूरी व्यवस्था के लिए केंद्र सरकार ने 23 अरब रुपये और प्रांतीय सरकारों ने 33 अरब रुपये आवंटित किए हैं। हालांकि, इस योजना को लेकर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि यह राहत बहुत कम है और इससे महंगाई के बड़े झटके को कम नहीं किया जा सकता। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने मौजूदा लाभार्थियों के लिए इस योजना को जारी रखने की अनुमति तो दे दी है, लेकिन नए लोगों को इसमें शामिल करने या पेट्रोलियम लेवी में कटौती करने का कड़ा विरोध किया है। अब पाकिस्तान सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह सामाजिक कल्याण और IMF की आर्थिक शर्तों के बीच संतुलन कैसे बनाए रखे।

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