UNGA में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष पर मध्यस्थता प्रयासों का किया खुलासा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने न्यूयार्क में आयोजित 81st United Nations General Assembly (UNGA) को संबोधित किया। अपने इस संबोधन के दौरान उन्होंने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध को रोकने के लिए पाकिस्तान की तरफ से की गई कूटनीतिक पहलों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रधानमंत्री शरीफ ने बताया कि इस गंभीर स्थिति में पाकिस्तान ने तुरंत कदम उठाया और अमेरिका तथा ईरान के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए एक मंच पर लाने में सफलता हासिल की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन प्रयासों में 'इस्लामाबाद वार्ता' और खुद उनके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump तथा ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian द्वारा हस्ताक्षरित 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' तनाव को कम करने की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण कदम साबित हुए।
संघर्ष की पृष्ठभूमि और वैश्विक चिंताएं
यह पूरा विवाद आधिकारिक तौर पर 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से हवाई हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत हो गई थी, जिसके बाद से पूरी दुनिया में अस्थिरता का माहौल पैदा हो गया। प्रधानमंत्री शरीफ ने अमेरिका और इजरायल के इस हमले को एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना करार दिया। उन्होंने बढ़ते तनाव और ड्रोन हमलों के खतरनाक सिलसिले के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि अब कूटनीति की आवाज को और अधिक तेज और मजबूत होना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने वैश्विक व्यापार के लिए Strait of Hormuz और Bab al-Mandeb जलडमरूमध्य को खुला रखने की अत्यधिक आवश्यकता पर भी जोर दिया ताकि दुनिया भर में व्यापार प्रभावित न हो।
नेताआें की बैठक और आगे के राजनीतिक कदम
इस बीच कूटनीतिक गतिविधियों के तहत प्रधानमंत्री शरीफ ने 24 सितंबर 2026 को यूएनजीए के इतर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से मुलाकात की थी। उसी दिन एक इंटरव्यू में ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया था कि ईरान किसी भी तरह की जंग नहीं चाहता है, लेकिन वह बातचीत के जरिए समझौते के लिए पूरी तरह तैयार है बशर्ते उस पर किसी भी प्रकार की धमकी का दबाव न डाला जाए। इन तमाम घटनाक्रमों से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 23 सितंबर को अपने यूएनजीए भाषण में एक समझौता करने या फिर इस्लामिक गणराज्य की तबाही का विकल्प सामने रखा था। साथ ही उन्होंने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को टालने का श्रेय भी खुद को दिया था।
क्षेत्रीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
पाकिस्तान की सरकार की तरफ से उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Ishaq Dar तथा सेना प्रमुख फील्ड मार्शल Asim Munir के प्रयास लगातार जारी हैं ताकि इस मामले का कोई स्थायी समाधान निकाला जा सके। सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र जैसे क्षेत्रीय देश भी इस पूरी प्रक्रिया में लगातार परामर्श कर रहे हैं। इस संघर्ष के दुष्प्रभावों से पूरी दुनिया जूझ रही है, जिसके तहत नाइजीरिया जैसे देशों में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ रहे हैं और समुद्री रास्ते का व्यापार भी बाधित हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के इस सत्र के दौरान काफी तनाव देखने को मिला, जिसमें इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के भाषण के समय कई देशों के प्रतिनिधियों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट किया।