संयुक्त राष्ट्र में शहबाज शरीफ ने उठाया कश्मीर का मुद्दा, की न्यायसंगत समाधान की मांग

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए कश्मीर विवाद पर खुलकर बात की। उन्होंने दुनिया के सामने इस पुराने मुद्दे को उठाया और एक न्यायसंगत और निष्पक्ष समाधान की मांग की। प्रधानमंत्री ने कहा कि कश्मीर के लोगों को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के तहत अपने भविष्य का फैसला करने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह का लंबे समय से इंतजार है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस दिशा में ध्यान देने की अपील की।
पीड़ित पीढ़ियों और मानवाधिकारों का जिक्र
अपने संबोधन के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि कश्मीर की कई पीढ़ियों ने अवैध कब्जे, मनमाने ढंग से हिरासत में रखे जाने और गैर-न्यायिक हत्याओं का सामना किया है। उन्होंने यह भी कहा कि घाटी में जबरन लोगों को गायब करने, यौन हिंसा और सामूहिक दंड जैसी परेशानियों का सामना आम लोगों को करना पड़ा है। उनके अनुसार, कश्मीरी माता-पिता आज भी अपने उन बच्चों का इंतजार करते हैं जो कभी लौटकर नहीं आए और कई लोगों के घरों में केवल सन्नाटा और गहरा दुख पसरा हुआ है।
जम्मू-कश्मीर की कानूनी स्थिति बदलने का आरोप
शहबाज शरीफ ने यह भी दावा किया कि हाल के दिनों में जनसांख्यिकी बदलाव और अन्य अवैध उपायों के जरिए जम्मू-कश्मीर की कानूनी स्थिति को बदलने की कोशिशें की गईं। उन्होंने कहा कि इन तमाम मुश्किलों के बाद भी कश्मीर के लोगों का हौसला कम नहीं हुआ है और वे अपने हक के लिए डटे हुए हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कश्मीरी जनता को यह भरोसा दिलाया कि उनका देश उन्हें हर संभव राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक समर्थन देना जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि यह समर्थन तब तक जारी रहेगा जब तक कश्मीरियों को उनका आत्मनिर्णय का अधिकार नहीं मिल जाता।
अंत में उन्होंने कहा कि कश्मीर हमेशा से पाकिस्तान की शह्रग रहा है और इस मसले पर देश का रुख पूरी तरह से स्पष्ट है। इस पूरी घटना की विस्तृत जानकारी आप ANI की रिपोर्ट में देख सकते हैं।