Pakistan Prison Crisis: पाकिस्तान की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी, 64 हजार की जगह बंद हैं 1.10 लाख लोग

Sushma Kumari1 September 20262 min read22 viewsWorld
Pakistan Prison Crisis: पाकिस्तान की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी, 64 हजार की जगह बंद हैं 1.10 लाख लोग

पाकिस्तान की जेलों में इन दिनों भारी भीड़ और कैदियों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ने से एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ANI News की रिपोर्ट के मुताबिक, देश की जेलों में कुल क्षमता केवल 64,000 कैदी रखने की है, लेकिन इस समय वहां लगभग 1.10 लाख कैदी बंद हैं।

1 सितंबर 2026 तक की स्थिति के अनुसार, जेलों में कैदियों के भरने की यह दर लगभग 155% तक पहुंच गई है। इस गंभीर समस्या के पीछे मुख्य वजह लंबे समय तक चलने वाले अदालती मुकदमे हैं, जिनकी वजह से हजारों लोग बिना किसी अंतिम फैसले के जेलों में रहने को मजबूर हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि कुल जेल की आबादी का 73% से ज्यादा हिस्सा उन कैदियों का है जिनका ट्रायल अभी चल रहा है और फैसला आना बाकी है।

पंजाब और सिंध की जेलों का हाल

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

पंजाब प्रांत की 45 जेलों में इस समय 38,000 कैदियों की क्षमता के मुकाबले 70,000 कैदी रखे गए हैं। इनमें से केवल 16,000 कैदियों को ही सजा सुनाई गई है, जबकि बाकी लोग विचाराधीन हैं। इसी तरह, सिंध प्रांत की 23 जेलों में 14,000 कैदियों की क्षमता है, लेकिन वहां 25,000 लोग बंद हैं और इनमें से मात्र 4,000 लोगों को ही अदालत से सजा मिली है। खैबर पख्तूनख्वा की 39 जेलों में भी ऐसा ही बुरा हाल है, जहां कुल 11,382 कैदियों में से केवल करीब 2,000 कैदी ही सजायाफ्ता हैं और बाकी सब जेलों में धक्के खा रहे हैं।

प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर सुधार के प्रयास

जेलों की इस व्यवस्था को सुधारने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही हैं। नेशनल जुडिशल पॉलिसी मेकिंग कमेटी ने 2 जुलाई 2026 को एक अहम कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी, जिसकी जानकारी PID Pakistan Press Release में दी गई है। इस बैठक में मुख्य न्यायाधीश Yahya Afridi ने कैदियों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया और जेल प्रशासन में जवाबदेही बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके अलावा, पंजाब सरकार ने 17 जुलाई 2026 को कैदियों के लिए एक विशेष डी-रेडिकलाइजेशन प्रोग्राम भी शुरू किया है, जिसके बारे में अधिक जानकारी Punjab Prisons Official Website पर उपलब्ध है। हालांकि अदालती फैसलों में देरी के कारण कैदियों की लगातार बढ़ती संख्या से प्रांतीय सरकारों पर बुनियादी ढांचे का भारी दबाव बना हुआ है।

Share:

Comments

Leave a comment