Pakistan: पंजाब सरकार बाजारों को जल्दी बंद करने पर कर रही विचार, व्यापारियों ने किया कड़ा विरोध.

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने संघीय सरकार के नए मितव्ययिता उपायों को लागू करने पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। स्थानीय व्यापार समुदाय ने बाजारों को जल्दी बंद करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है, जिसके कारण प्रांतीय प्रशासन किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंच सका है। Dawn की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मुद्दे को लेकर प्रांतीय प्रशासन और व्यापारियों के बीच अब तक कुल तीन दौर की बैठकें हो चुकी हैं। इसके बावजूद व्यापारी इस बात से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं और वे लगातार सरकार के सामने कई तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं।
व्यापारियों और अधिकारियों के बीच चर्चा
एक वरिष्ठ पंजाब सरकार के अधिकारी ने जानकारी दी कि जब से देश में आर्थिक स्थिति खराब हुई है, तब से कारोबारियों का कामकाज पहले से ही काफी ज्यादा डिस्टर्ब चल रहा है। व्यापारियों का साफ तौर पर कहना है कि जब उनकी दुकानें और व्यापारिक गतिविधियां पहले से ही भारी संकट के दौर से गुजर रही हैं, तो ऐसे मुश्किल समय में दुकान बंद करने का समय तय करने से उन्हें क्या फायदा मिलेगा। व्यापारियों ने अधिकारियों से सीधा सवाल किया कि क्या काम के घंटे कम करने से वाकई कोई वित्तीय लाभ होगा या फिर ईंधन की बचत हो पाएगी। उनका जवाब खुद ही ना में था क्योंकि उनका मानना है कि इससे किसी भी प्रकार की राहत मिलने वाली नहीं है।
व्यापारियों ने बैठकों के दौरान तर्क दिया कि बाजार का समय फिक्स करने से ईंधन की लागत में कोई कमी नहीं आएगी क्योंकि आम लोग खाने-पीने और अन्य जरूरी कामों के लिए बाजारों में आते ही रहेंगे। इसलिए उन्होंने सरकार को सलाह दी कि जिस तरह संघीय सरकार ने प्रतिबंध लगाए हैं, उन्हें प्रांतीय स्तर पर लागू करने से बचा जाए। हालांकि, सरकार की तरफ से यह स्पष्ट किया गया है कि आने वाले दिनों में व्यापारियों के साथ बातचीत का सिलसिला लगातार जारी रहेगा ताकि स्थिति को देखते हुए कोई ठोस और अंतिम फैसला लिया जा सके।
संघीय सरकार के नए निर्देश और ईंधन संकट
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पंजाब में यह बहस तब शुरू हुई जब पिछले गुरुवार को संघीय सरकार ने देश में ईंधन बचाने और खर्चों में कटौती करने के लिए नए उपायों की घोषणा की थी। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण तेल की आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिसके बाद सरकार को यह कदम उठाना पड़ा। संघीय नियमों के तहत शॉपिंग मॉल, बाजार, डिपार्टमेंटल स्टोर और किराने की दुकानों को रात 9 बजे तक बंद करने का सख्त निर्देश दिया गया था। इसके अलावा, सरकारी गाड़ियों के लिए ईंधन का कोटा भी घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया था, हालांकि इसमें सशस्त्र बलों, नागरिक सुरक्षा संस्थानों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को छूट दी गई थी।
पंजाब प्रांत में ईंधन की कीमतों को लेकर भी भारी अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि दाम रोजाना ऊपर-नीचे हो रहे हैं। इससे सरकारी हलकों में भी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। पंजाब ने इस साल मार्च के महीने में भी कई तरह के लागत-कटौती उपाय लागू किए थे, जिसमें बाजार के खुलने और बंद करने के समय पर पाबंदियां शामिल थीं। बाद में मई के महीने में उनमें से कुछ नियमों में ढील दी गई थी और जिम तथा अन्य व्यवसायों को छूट दे दी गई थी। उस समय सभी प्रांतों ने एक साथ मिलकर मितव्ययिता उपायों का ऐलान किया था, लेकिन इस बार पंजाब ने संघीय सरकार के नए प्रतिबंधों पर अपनी अंतिम मुहर नहीं लगाई है।
पुराने नियम और छूट की स्थिति
इससे पहले पंजाब सरकार ने वाणिज्यिक बाजारों, शॉपिंग मॉल और थोक दुकानों के लिए सुबह 9 बजे से रात 10 बजे तक सोमवार से शनिवार तक का समय तय किया था। रविवार के दिन इन दुकानों को दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक खोलने की अनुमति दी गई थी। इसके अलावा रेस्टोरेंट, होटल, कॉफी शॉप और अन्य भोजनालयों को शुक्रवार से रविवार तक आधी रात तक और सोमवार से गुरुवार तक रात 11 बजे तक खुला रखने की छूट मिली हुई थी। घरों पर सामान पहुंचाने वाली होम डिलीवरी सेवाएं रात के 2 बजे तक चालू रखने की इजाजत दी गई थी।
अप्रैल महीने की अधिसूचना के मुताबिक जिन व्यवसायों को पूरी तरह छूट दी गई थी, उनमें मेडिकल स्टोर, फार्मेसी, अस्पताल, प्रयोगशालाएं, पेट्रोल पंप, सीएनजी स्टेशन, दूध की दुकानें, तंदूर और टायर पंचर की दुकानें शामिल थीं। इसके बाद मई में खेल सुविधाओं, जिम, आईटी कंपनियों और कॉल सेंटर्स को भी इसमें शामिल कर लिया गया था। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में प्रांतीय सरकार व्यापारियों के साथ और बातचीत करने के बाद क्या नया कदम उठाती है, ताकि बाजार और अर्थव्यवस्था दोनों का संतुलन बना रहे।