Pakistan का बड़ा फैसला, सऊदी अरब की सैन्य मदद की मांग को किया खारिज, यमन के खिलाफ नहीं भेजेंगे सेना।

Sushma Kumari12 September 20262 min read23 viewsSaudi
Pakistan का बड़ा फैसला, सऊदी अरब की सैन्य मदद की मांग को किया खारिज, यमन के खिलाफ नहीं भेजेंगे सेना।

पाकिस्तान ने यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होने से साफ मना कर दिया है। सऊदी अरब की तरफ से लगातार दबाव बनाया जा रहा था कि मक्का ज्वॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट के तहत पाकिस्तानी सेना सऊदी अरब की मदद करे और हमलों का जवाब दे। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल ऐसा कोई भी सैन्य हस्तक्षेप विचाराधीन नहीं है और वे क्षेत्रीय शांति को बनाए रखने के पक्ष में हैं।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान

बीते 10 सितंबर 2026 को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने मीडिया को बताया कि लड़ाकू गतिविधियों में हिस्सा लेने को लेकर अभी कोई चर्चा नहीं चल रही है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि जरूरत पड़ने पर समझौते के नियमों के अनुसार उचित समय पर कदम उठाया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 11 सितंबर 2026 को विदेश कार्यालय ने हूती ठिकानों पर सैन्य हमलों से जुड़ी सभी अटकलों को केवल एक काल्पनिक बात कहकर खारिज कर दिया। सरकार का कहना है कि सऊदी की जमीन के भीतर सुरक्षा में मदद दी जा सकती है, लेकिन विदेशी धरती पर जाकर सीधे तौर पर आक्रामक युद्ध में शामिल नहीं हुआ जाएगा।

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मक्का डिफेंस ट्रीटी और उसकी शर्तें

इस समझौते पर इसी साल 7 अगस्त 2026 को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने हस्ताक्षर किए थे। इस संधि के नियमों के मुताबिक यदि किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसके बावजूद पाकिस्तानी हुक्मरानों का यही मानना है कि यह समझौता पूरी तरह से रक्षात्मक यानी डिफेंसिव है। अधिकारियों के मुताबिक इस ट्रीटी को अभी पूरी तरह से अमलीजामा पहनाया जा रहा है और इसके सैन्य तंत्र अभी तक पूरी तरह से सक्रिय नहीं हुए हैं। इस्लामाबाद का तर्क है कि यह पुराना यमन का गृहयुद्ध है, जिस पर यह नया समझौता लागू नहीं होता है।

लाल सागर में बढ़ते तनाव और कूटनीतिक संतुलन

ईरान समर्थित हूती संगठन (अंसार अल्लाह) ने यमन के पूरे लाल सागर तट और रणनीतिक बाब अल-मदब जलडमरूमध्य पर अपना कब्जा जमा लिया है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इसी के चलते 12 सितंबर 2026 को सऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस समूह के खिलाफ सख्त कदम उठाने की अपील की। सऊदी सरकार लगातार खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा के लिए अपनी सैन्य ताकत मजबूत करने में जुटी है। दूसरी ओर, पाकिस्तान बहुत संभलकर कदम रख रहा है ताकि रियाद के साथ उसके रक्षा समझौते भी सुरक्षित रहें और ईरान के साथ उसके कूटनीतिक रिश्ते भी खराब न हों।

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