पाकिस्तान ने ठुकराए अमेरिका के प्रतिबंध, ईरान के साथ व्यापार जारी रखने का किया बड़ा ऐलान

पाकिस्तान ने ईरान के खिलाफ लगाए गए अमेरिका के एकतरफा प्रतिबंधों को मानने से साफ इनकार कर दिया है और तेहरान के साथ अपने व्यापारिक रिश्तों को पूरी तरह से जारी रखने की बात कही है। इस्लामाबाद सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक वह अपने पड़ोसी देश के साथ कारोबार करना बंद नहीं करेगा। अमेरिका लगातार ईरान पर दबाव बना रहा है, लेकिन पाकिस्तान और चीन जैसे देशों ने इस अमेरिकी फैसले के खिलाफ खुलकर अपनी बात रखी है और साफ कर दिया है कि वे बाहरी दबाव में आकर कोई कदम नहीं उठाएंगे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दी पूरी जानकारी
इस्लामाबाद में हुई साप्ताहिक प्रेसवार्ता के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने गुरुवार को यह बड़ा बयान दिया। उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि उनका देश लंबे समय से किसी भी तरह के एकतरफा कदमों और प्रतिबंधों को सही नहीं मानता है। उनके मुताबिक इस तरह के आर्थिक प्रतिबंधों का असर हमेशा नकारात्मक होता है और इससे आम लोगों तथा क्षेत्रीय शांति को नुकसान पहुंचता है। पाकिस्तान ने साफ किया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए पाबंदी लगाने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।
अमेरिका का नया आर्थिक दबाव और चेतावनी
यह पूरा मामला तब सामने आया जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों का एक नया दौर शुरू कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने उन सभी देशों और कंपनियों को चेतावनी दी है जो ईरान के साथ किसी भी तरह का व्यापारिक रिश्ता रखते हैं। अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने नए आर्थिक अभियान का ऐलान करते हुए कहा था कि उनका मुख्य मकसद दुनिया भर में ईरान के वित्तीय नेटवर्क पर शिकंजा कसना है। इसके साथ ही यह भी चेतावनी दी गई कि जो भी देश ईरान के साथ कारोबार जारी रखेगा, उसे भी अमेरिकी पाबंदियों और कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिका की इस सख्ती के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक हलचल काफी तेज हो गई है।
चीन भी कर चुका है अमेरिकी दबाव का विरोध
अकेला पाकिस्तान ही नहीं बल्कि ड्रैगन यानी चीन ने भी ईरान के साथ व्यापार पर अमेरिकी दबाव का कड़ा विरोध किया है। बीजिंग का यह साफ कहना है कि ईरान के साथ उनका सामान्य आर्थिक सहयोग पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में आता है और इसमें किसी भी बाहरी देश को दखलंदाजी करने का कोई हक नहीं है। अमेरिका के लगातार बढ़ते दबाव के बावजूद एशिया के ये बड़े देश तेहरान के साथ अपने आर्थिक रिश्तों को बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं ताकि ऊर्जा और व्यापार पर बुरा असर न पड़े।
होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय शांति पर पाकिस्तान की नजर
दुनियाभर की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर भी पाकिस्तान ने अपना सकारात्मक रुख साफ किया है। प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि आपसी बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से जुड़े सभी विवादों को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस क्षेत्र में शांति का असली रास्ता तभी निकलेगा जब अमेरिका और ईरान आमने-सामने बैठकर किसी नतीजे पर पहुंचेंगे। पाकिस्तान इस समय दोनों पक्षों के बीच तनाव को कम करने के लिए अपने स्तर पर कूटनीतिक प्रयास कर रहा है ताकि वैश्विक तेल और गैस की सप्लाई पर कोई संकट न आए।
आसिम मुनीर के तेहरान दौरे पर सफाई
पाकिस्तान ने अपनी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के हालिया तेहरान दौरे को लेकर चल रही तमाम अटकलों को भी सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने उन मीडिया दावों को पूरी तरह गलत बताया जिनमें कहा जा रहा था कि मुनीर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के किसी खास दूत के तौर पर ईरान गए थे। पाकिस्तान ने स्पष्ट किया कि सेना प्रमुख का यह दौरा सिर्फ दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय शांति कायम करने के लिए जारी कूटनीतिक कोशिशों का एक अहम हिस्सा था। तेहरान में पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने वहां के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई मुद्दों पर सार्थक चर्चा की है। पाकिस्तान का एकमात्र उद्देश्य यही है कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा गतिरोध जल्द से जल्द खत्म हो और बातचीत के जरिए क्षेत्र में अमन-चैन बहाल हो सके।