पाकिस्तान में बढ़ती गरीबी, रावलपिंडी में मजदूर सड़क पर सोने को मजबूर

पाकिस्तान में आर्थिक तंगी और आसमान छूती महंगाई ने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि देश के कई हिस्सों में दिहाड़ी मजदूरों के पास सिर छुपाने के लिए छत तक नहीं बची है। रावलपिंडी में पाकिस्तान बढ़ती गरीबी के कारण हजारों मजदूर और श्रमिक सड़कों के किनारे, फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर रात बिताने को मजबूर हो गए हैं।
फुटपाथ और मेट्रोबस ट्रैक बने आशियाने
स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, रावलपिंडी के विभिन्न इलाकों में मजदूरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है जो रात होते ही खुले आसमान के नीचे सोने को विवश होते हैं।
- मरी रोड, चांद नी चौक, रहमानबाद और लियाकत बाग चौक जैसे प्रमुख मार्गों पर मजदूरों को रात बिताते देखा जा सकता है।
- कई मजदूर बारिश और सुबह की ठंड से बचने के लिए मेट्रोबस ट्रैक के नीचे या दुकानों के शेड का सहारा लेते हैं।
- सामान्य बस स्टैंड पीर वधाई और प्रमुख बाजारों के आसपास भी यही दर्दनाक तस्वीर नजर आती है।
इनमें से अधिकांश मजदूर खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब के दूरदराज के इलाकों से रोजगार की तलाश में रावलपिंडी आए थे। दिनभर भारी सामान उठाने, ढुलाई करने या अन्य छोटे-मोटे दिहाड़ी काम करके वे बमुश्किल अपनी आजीविका चलाते हैं, लेकिन महंगाई इतनी बढ़ चुकी है कि वे एक छोटा कमरा किराए पर लेने में भी असमर्थ हैं।
मुफ्त भोजन पर निर्भरता
दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद इन मजदूरों की कमाई बमुश्किल 700 से 1,000 पाकिस्तानी रुपये के बीच होती है, जो कि आज के समय में बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए भी नाकाफी है। ऐसे में कई लोग खाने के लिए भी दूसरों की मदद पर निर्भर हैं।
राजा बाजार, जामा मस्जिद रोड और बारा बाजार में कई दयालु लोग और सामाजिक संस्थाएं इन गरीबों के लिए मुफ्त भोजन की व्यवस्था करती हैं। भोजन के समय इन जगहों पर लंबी कतारें लग जाती हैं, जिनमें छोटे बच्चों के साथ गरीब महिलाएं भी शामिल होती हैं। यह स्थिति पाकिस्तान के निचले طبक़े के सामने खड़ी गंभीर मानवीय चुनौती को साफ बयां करती है।