सऊदी अरब की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध पाकिस्तान, यमन विवाद से बनाई दूरी
पाकिस्तान ने सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा का संकल्प लिया है, लेकिन यमन के आंतरिक संघर्ष से दूरी बनाए रखी है।

इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने एक बार फिर सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए अपनी अटूट प्रतिबद्धता जताई है। सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने 30 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि पाकिस्तान सऊदी अरब की सुरक्षा के साथ-साथ मक्का और मदीना में पवित्र स्थलों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह समर्पित है।
सुरक्षा साझेदारी की पुष्टि करते हुए प्रवक्ता ने यह भी साफ किया कि पाकिस्तान यमन के भीतर चल रहे संघर्ष में शामिल नहीं है। उन्होंने इस विवाद को यमन का आंतरिक मामला बताया और कहा कि इस संकट का समाधान केवल बातचीत के जरिए ही संभव है। पाकिस्तान ने यमन की एकता और स्वतंत्रता का समर्थन भी किया है।
दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग काफी मजबूत है। मई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान ने सऊदी अरब की धरती पर 8,000 सैनिक, एक फाइटर स्क्वाड्रन और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर रखा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए 7 अगस्त 2026 को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' (MJDA) पर हस्ताक्षर किए थे। इस त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते के तहत एक सामूहिक निवारण तंत्र बनाया गया है, जिसमें किसी भी एक हस्ताक्षरकर्ता देश पर सशस्त्र हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
क्षेत्रीय स्थिरता के मोर्चे पर लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी ने बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रही मध्यस्थता की कोशिशों को लेकर पाकिस्तानी सेना 'सतर्क रूप से आशावादी' है। यह कूटनीतिक प्रयास पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तेहरान की कई हालिया यात्राओं के बाद शुरू हुए हैं।