सऊदी सुरक्षा पर पाकिस्तान का अटल साथ, शहबाज़ शरीफ़ ने दोहराया वादा

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने सऊदी अरब के साथ एकजुटता को एक बार फिर मजबूती से दोहराया है। उन्होंने साफ़ कहा है कि पाकिस्तान सऊदी नेतृत्व और वहां की जनता के साथ खड़ा है और राज्य की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। यह रुख मक्का संयुक्त रक्षा समझौते (MJDA) पर आधारित है, जिस पर 7 अगस्त 2026 को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने हस्ताक्षर किए थे।
इस समझौते की सबसे अहम बात यह है कि इसमें तीनों देशों ने एक-दूसरे की रक्षा की जिम्मेदारी साझा की है। इसका ढांचा काफ़ी हद तक नाटो के अनुच्छेद 5 जैसा बताया गया है, यानी किसी एक पर हमला सबके ऊपर हमला माना जाएगा। इसी पृष्ठभूमि में यह बयान अहम हो जाता है, क्योंकि हाल के दिनों में हूती विद्रोहियों के हमलों ने सऊदी अरब को सीधे निशाने पर ला दिया है।
हूती हमलों में रियाद के किंग ख़ालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाया गया। शहबाज़ शरीफ़ ने इन हमलों की कड़ी निंदा की और तुरंत हिंसा रोकने की अपील की। उन्होंने सऊदी अरब के अपने नागरिकों और अहम बुनियादी ढांचे की रक्षा के अधिकार का पूरा समर्थन किया। साथ ही सऊदी सशस्त्र बलों और गठबंधन की उस पेशेवर क्षमता की भी तारीफ़ की, जिससे बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही रोका गया। पाकिस्तान ने मक्का और मदीना के पवित्र स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।
संयुक्त राष्ट्र में भी गूंजा संदेश
यह संदेश सिर्फ इस्लामाबाद तक सीमित नहीं रहा। 9 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत आसिम इफ़्तिखार अहमद ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सत्र में इन्हीं बातों को आगे बढ़ाया। उन्होंने सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को ही आधार बताया। इससे एक दिन पहले, 8 अक्टूबर 2026 को पाकिस्तानी सेना ने पुष्टि की थी कि सऊदी अरब में सैनिकों की तैनाती की जा रही