पाकिस्तान में जहरीली हवा का कहर, 48 घंटे में अस्पतालों पहुंचे 2,961 मरीज
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में खतरनाक स्मॉग से स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति है। मुल्तान और लाहौर समेत कई शहरों में प्रदूषण स्तर चरम पर पहुंचा।

रावलपिंडी (पाकिस्तान): पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बड़े शहरों में स्मॉग और गिरती हवा की गुणवत्ता ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। इस्लामाबाद और रावलपिंडी समेत कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया है कि लोग गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का सामना कर रहे हैं।
प्रदूषण के कारण लोगों में सांस की बीमारियों, अस्थमा, गले के संक्रमण, आंखों में जलन, सर्दी और लगातार खांसी की समस्या तेजी से बढ़ी है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, रावलपिंडी में स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति साफ नजर आ रही है। यहां महज 48 घंटों के भीतर तीन सहयोगी अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड और ओपीडी में स्मॉग से पीड़ित 2,961 मरीजों ने इलाज करवाया।
अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों में ज्यादातर बुजुर्ग पुरुष और महिलाएं शामिल थीं, जिससे पता चलता है कि जहरीली हवा का सबसे बुरा असर बुजुर्गों पर पड़ रहा है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। मुल्तान में AQI 719 के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया, जबकि लाहौर में यह 530 दर्ज किया गया।
अन्य शहरों की बात करें तो झंग में AQI 678 और गुजरांवाला में 600 से 660 के बीच रहा। फैसलाबाद में यह स्तर 371, इस्लामाबाद में 187 और रावलपिंडी में 179 दर्ज किया गया। यहां तक कि 'क्वीन ऑफ हिल्स' कहे जाने वाले मुर्री में भी AQI 123 को पार कर गया है। गुजरांवाला, फैसलाबाद और झंग जैसे औद्योगिक केंद्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
प्रशासन को डर है कि अगर अगले तीन दिनों में बारिश नहीं हुई, तो प्रदूषण का स्तर और अधिक बढ़ सकता है। स्वास्थ्य अधिकारियों और डॉक्टरों ने लोगों को बाहर निकलते समय सुरक्षा मास्क पहनने की सलाह दी है। बच्चों और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर न जाने को कहा गया है।
लोगों को सुबह और शाम के समय घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने की हिदायत दी गई है। साथ ही यह भी बताया गया है कि आंखों में ड्रॉप डालने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें।
पर्यावरण संरक्षण विभाग ने इस संकट के मुख्य कारणों में ईंट भट्टों, स्टोन क्रशर्स, औद्योगिक उत्सर्जन, वाहनों के धुएं, पराली जलाने और पुराने टायरों को जलाकर काला तेल निकालने की प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट में धुंआ छोड़ने वाले वाहनों को प्रदूषण का एक गंभीर स्रोत बताया गया है।