सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने बढ़ाई सैन्य ताकत, मक्का रक्षा समझौते को लेकर हुई बड़ी बातचीत.

Praggya Singh sabal6 September 20262 min read23 viewsSaudi
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने बढ़ाई सैन्य ताकत, मक्का रक्षा समझौते को लेकर हुई बड़ी बातचीत.

पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Senator Mohammad Ishaq Dar ने 6 सितंबर 2026 को सऊदी अरब और तुर्किए के अपने समकक्षों के साथ एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक चर्चा की। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत रणनीतिक सहयोग को और अधिक मजबूत करना था। अधिकारियों के अनुसार यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी संबंधों को एक नई दिशा देने के लिए उठाया गया है, जिससे खाड़ी देशों और दक्षिण एशिया के बीच रक्षा संबंधों में और प्रगाढ़ता आएगी।

मक्का रक्षा समझौते की पृष्ठभूमि और हालिया बैठक

सेंसर डार ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan और तुर्किए के विदेश मंत्री Hakan Fidan के साथ अलग-अलग टेलीफोन पर बातचीत की। यह बातचीत 31 अगस्त 2026 को इस्तांबुल में हुई रणनीतिक राजनीतिक और रक्षा समिति की पहली बैठक के बाद के फॉलो-अप कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए की गई थी। इन तीनों नेताओं ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के साथ-साथ बहुपक्षीय मंचों पर आपसी हितों के मामलों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। मक्का रक्षा गठबंधन को औपचारिक रूप से 7 अगस्त 2026 को तुर्किए के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdogan, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif द्वारा साइन किया गया था।

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सामूहिक सुरक्षा और स्थायी सचिवालय का गठन

यह समझौता एक सामूहिक सुरक्षा संधि के रूप में काम करता है, जिसके तहत यदि सदस्य देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य सैन्य सहयोग को संस्थागत बनाना, संयुक्त रूप से तकनीक विकसित करना और उत्पादन बढ़ाना तथा सशस्त्र बलों के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करना है। इस योजना के तहत सऊदी अरब में एक स्थायी सचिवालय स्थापित किया जाएगा, और इस सचिवालय के पहले महासचिव की नियुक्ति पाकिस्तान से तीन साल के कार्यकाल के लिए की जाएगी।

भविष्य की रूपरेखा और क्षेत्रीय विस्तार

इस समझौते के भविष्य को लेकर तुर्किए के विदेश मंत्री हाकान फिडान ने बताया कि अभी एक परिग्रहण रोडमैप तैयार किया जा रहा है, जिसमें मिस्र जैसे क्षेत्रीय साझेदारों को भी इसमें शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता पूरी तरह से एक रक्षात्मक व्यवस्था है जिसका उद्देश्य केवल क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखना है और यह किसी भी विशिष्ट देश के खिलाफ नहीं है। पाकिस्तान ने भी यह साफ कर दिया है कि यह गठबंधन उन सभी क्षेत्रीय देशों के लिए खुला है जो इसके बुनियादी सिद्धांतों का सम्मान करने के लिए तैयार हैं। इस पूरी प्रक्रिया से क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का माहौल मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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