पाकिस्तान में हिंसा और संघर्ष से जुड़ी मौतों में 83 प्रतिशत का बड़ा उछाल

Gautam Sahu2 October 20262 min read0 viewsWorld
पाकिस्तान में हिंसा और संघर्ष से जुड़ी मौतों में 83 प्रतिशत का बड़ा उछाल

पाकिस्तान में आंतरिक सुरक्षा की स्थिति एक बार फिर बेहद चिंताजनक मोड़ पर पहुंच गई है। साल 2026 की तीसरी तिमाही के दौरान देश में हिंसा और संघर्ष से जुड़ी घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या में 83 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस आंकड़े ने साल की पहली दो तिमाहियों में आए सकारात्मक सुधार के संकेतों को पूरी तरह से उलट दिया है, जिससे देश भर में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

हाल ही में जारी की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस तिमाही में कुल 385 हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें कम से कम 1,415 लोगों की जान चली गई और 558 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इन आंकड़ों में आम नागरिक, सुरक्षा बल के जवान और अपराधी सभी शामिल हैं। साल 2021 के बाद से तिमाही दर तिमाही के हिसाब से हिंसा में यह सबसे तेज और खतरनाक उछाल माना जा रहा है।

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बलोचस्तान और खैबर पख्तूनख्वा बने हिंसा के मुख्य केंद्र

देश के विभिन्न हिस्सों में अस्थिरता का असर अलग-अलग रूप में दिखा, लेकिन दो प्रांत ऐसे रहे जिन्होंने इस हिंसा का सबसे बड़ा और भयानक दर्द झेला:

  • बलोचस्तान: यह प्रांत इस तिमाही में हिंसा से सबसे बुरी तरह प्रभावित रहा। अकेले बलोचस्तान में राष्ट्रीय स्तर पर हुई कुल मौतों का लगभग 59 प्रतिशत हिस्सा यानी 829 मौतें दर्ज की गईं। यहां हिंसा की 186 घटनाएं हुईं।
  • खैबर पख्तूनख्वा: दूसरे सबसे प्रभावित क्षेत्र के रूप में इस प्रांत में 556 मौतें हुईं, जो कुल मौतों का 39 प्रतिशत से अधिक है। यहां 173 हिंसक घटनाएं रिकॉर्ड की गईं।

इन दोनों प्रांतों को मिलाकर देखें तो अकेले बलोचस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में देश भर की कुल मौतों का 98 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया है।

सुरक्षा ऑपरेशनों और हताहतों की स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए अभियानों के दौरान भी भारी संख्या में मौतें हुईं। कुल मौतों में से 65 प्रतिशत से अधिक यानी 921 मौतें अपराधियों और सशस्त्र तत्वों की थीं, जो लगभग 154 सुरक्षा ऑपरेशनों के दौरान हुईं। केवल बलोचस्तान में ही पिछली तिमाही के मुकाबले मौतों का आंकड़ा तिगुने से भी ज्यादा बढ़कर 265 से सीधे 829 पर पहुंच गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि आंतरिक मोर्चे पर बढ़ती यह अशांति और बिगड़ते हालात पाकिस्तान की नीतियां और उनकी आंतरिक सुरक्षा प्राथमिकताओं पर गंभीर सवालिया निशान लगाते हैं। यदि स्थिति पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है।

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