बलोचिस्तान में पाकिस्तानी सेना पर नागरिकों को डराने और जबरन विस्थापित करने का आरोप
बलोचिस्तान के सुराब और कालात जिलों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा नागरिकों को धमकाने और जबरन विस्थापित करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

बलोचिस्तान (पाकिस्तान): बलोचिस्तान के सुराब जिले में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर घर-घर तलाशी अभियान के दौरान स्थानीय निवासियों को डराने और उनके साथ मारपीट करने के आरोप लगे हैं। द बलोचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्रवाई से आम नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्र में बढ़ते विस्थापन को लेकर गहरी चिंताएं पैदा हो गई हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बलों की बड़ी टुकड़ियों ने रोडेनी और डम्ब इलाकों में प्रवेश कर रिहायशी मकानों की तलाशी ली। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि इस ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें धमकाया और उनके साथ शारीरिक हिंसा की, हालांकि किसी की गिरफ्तारी की खबर नहीं मिली है।
इलाके के लोगों का यह भी आरोप है कि सुरक्षा अधिकारी परिवारों को उनके घरों और पुश्तैनी जमीनों से जबरन हटाने की कोशिश कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने दावा किया कि नागरिक बस्तियों पर बार-बार ड्रोन हमले भी किए गए हैं।
इससे पहले एक पाकिस्तानी सैन्य कैंप के पास रहने वाले परिवारों को वहां से हटने के लिए मजबूर किया गया था। वहीं, सुराब बाजार से 20 से अधिक नागरिकों को हिरासत में लेकर सैन्य कैंप में ले जाने की बात भी सामने आई है।
विस्थापन का यह संकट केवल सुराब तक सीमित नहीं है। कालात जिले के शोर पारोड इलाके में प्रांतीय अधिकारियों ने करीब 5,000 परिवारों को 30 अक्टूबर तक अपने घर खाली करने और निर्धारित कैंपों में जाने का आदेश दिया था। इसमें लगभग 30,000 लोग शामिल हैं।
गृह विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मोहम्मद हमजा शफकात ने कहा कि जो निवासी खाली करने के आदेश का पालन नहीं करेंगे, उन्हें सुरक्षा बलों द्वारा जबरन हटाया जाएगा।
बलोच नेशनल मूवमेंट की मानवाधिकार शाखा 'पांक' ने इस आदेश की कड़ी आलोचना की है। संगठन ने कहा कि क्षेत्र में सशस्त्र लड़ाकों की मौजूदगी या जमीन पर सरकारी स्वामित्व के दावों के आधार पर आम नागरिकों को जबरन विस्थापित नहीं किया जा सकता।
पांक ने अपने बयान में कहा कि पुश्तैनी जमीन किसी समुदाय की पहचान, इतिहास और सामूहिक अस्तित्व का केंद्र होती है, यह महज एक भौगोलिक संपत्ति नहीं है। संगठन ने चेतावनी दी कि सर्दियों से पहले बलोचिस्तान के सबसे ठंडे इलाकों में हजारों परिवारों को कैंपों में भेजने से उनकी सेहत और जीवन को गंभीर खतरा हो सकता है।