Palestine Action Protest: ब्रिटेन में चार कार्यकर्ताओं ने आतंकवाद से जुड़ी जेल की सजा के खिलाफ की अपील.

Nura Basta3 September 20262 min read20 viewsWorld
Palestine Action Protest: ब्रिटेन में चार कार्यकर्ताओं ने आतंकवाद से जुड़ी जेल की सजा के खिलाफ की अपील.

ब्रिटेन में फिलिस्तीन के समर्थन में आवाज उठाने वाले चार कार्यकर्ताओं ने अपनी सजा के खिलाफ कोर्ट में अपील दाखिल कर दी है। साल 2024 में ब्रिस्टल के पास स्थित एक आर्म्स फैक्ट्री पर प्रदर्शन करने वाले इन कार्यकर्ताओं को आतंकवाद से जुड़े मामलों में लंबी सजा सुनाई गई थी। इस पूरे मामले में कानूनी टीम ने कोर्ट में अपील की है कि सजा बहुत ज्यादा है और इसे आतंकवाद की श्रेणी में रखना पूरी तरह गलत है।

क्या है पूरा मामला और सजा की वजह

पैलेस्टाइन एक्शन से जुड़े चार कार्यकर्ताओं—Charlotte 'Lottie' Head, जिनकी उम्र 30 वर्ष है, Fatema Zainab Rajwani, जिनकी उम्र 22 वर्ष है, Leona 'Ellie' Kamio, जिनकी उम्र 31 वर्ष है, और Samuel Corner, जिनकी उम्र 24 वर्ष है—ने आधिकारिक तौर पर अपनी सजा को चुनौती दी है। इन सभी ने अगस्त 2024 में फिल्टन के एलबिट सिस्टम्स फैक्ट्री पर प्रदर्शन किया था। मई 2026 में अदालत ने इन्हें आपराधिक नुकसान पहुंचाने का दोषी माना था। इसके बाद जून 2026 में जस्टिस जॉनसन ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इनके अपराधों का संबंध आतंकवाद से है, जिसके चलते इन्हें चार से आठ साल तक की जेल की सजा भुगतनी पड़ रही है।

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कानूनी टीम और वकीलों का पक्ष

बीते 3 सितंबर 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया था। इस दौरान आईटीएन सॉलिसिटर्स के प्रमुख वकील साइमन नतास ने जानकारी दी कि अपील के लिए आवेदन कोर्ट ऑफ अपील को मिल चुका है। वकीलों का कहना है कि यह सजा नियमों के हिसाब से बहुत ज्यादा सख्त है और जज ने कानून को समझने में गलती की है। वकील साइमन नतास ने बताया कि अपने 15 साल के करियर में उन्होंने कभी ऐसा नहीं देखा कि किसी सीधे प्रदर्शन को आतंकवाद मान लिया गया हो। डिफेंस टीम का तर्क है कि अदालत ने आतंकवाद अधिनियम 2000 के तहत संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले नियम का गलत इस्तेमाल किया है। इसके अलावा, आतंकवाद से जुड़े होने की बात भी फैसला आने के बाद ही सामने लाई गई थी।

मानवाधिकारों और राजनीतिक प्रभाव पर सवाल

इस अपील में यह भी कहा गया है कि यह सजा यूरोपीय मानवाधिकार सम्मेलन के नियमों के खिलाफ है। कार्यकर्ताओं के वकीलों का साफ कहना है कि उनका मकसद आम जनता में डर पैदा करना या सरकार पर दबाव डालना नहीं था, बल्कि वे सिर्फ इजरायल को हथियारों की सप्लाई रोकने की कोशिश कर रहे थे। जेल से ही अपना बयान देते हुए शार्लोट हेड ने आरोप लगाया कि पैलेस्टाइन एक्शन संगठन पर प्रतिबंध लगाने के लिए इस पूरे मामले में राजनीतिक दबाव का इस्तेमाल किया गया। लिबर्टी और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे मानवाधिकार संगठनों ने भी चेतावनी दी है कि इस फैसले से एक ऐसा रास्ता खुल रहा है जहाँ शांतिपूर्ण प्रदर्शन और आतंकवाद के बीच का अंतर खत्म हो रहा है। फिलहाल इस अपील पर कोर्ट के एक जज द्वारा विचार किया जाना बाकी है।

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