Palestine Action पर अमेरिका का बड़ा एक्शन, यूएन अधिकारी ने लगाया आवाज़ दबाने का गंभीर आरोप.

Aanya26 August 20263 min read58 viewsWorld
Palestine Action पर अमेरिका का बड़ा एक्शन, यूएन अधिकारी ने लगाया आवाज़ दबाने का गंभीर आरोप.

अमेरिका ने ब्रिटेन के संगठन Palestine Action को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है और उसे आधिकारिक तौर पर आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छिड़ गई है और संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष रिपोर्टर ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। अमेरिकी सरकार के इस सख्त कदम से संगठन की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं और वैश्विक राजनीति में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

आतंकी संगठन घोषित करने के पीछे क्या है वजह

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की वेबसाइट पर जारी नोटिस के अनुसार, यह फैसला 26 अगस्त 2026 को लिया गया, जिसके तहत इस ब्रिटिश समूह को Specially Designated Global Terrorist यानी विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध किया गया। इस प्रतिबंध के लागू होने के बाद अमेरिका के भीतर इस संगठन की सभी संपत्तियों को तुरंत प्रभाव से फ्रीज कर दिया गया है। इसके अलावा, अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों के लिए इस समूह के साथ किसी भी तरह का व्यापारिक या व्यावसायिक लेन-देन करना पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि इस समूह की सोशल मीडिया गतिविधियां आतंकवाद को बढ़ावा देती हैं और ऐसी अंतरराष्ट्रीय प्रत्यक्ष कार्रवाई की रणनीति को प्रोत्साहित करती हैं जो अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं। यह पहली बार है जब अमेरिका ने किसी ब्रिटिश वामपंथी संगठन के खिलाफ इस तरह के कड़े आतंकवाद विरोधी प्रतिबंध लगाए हैं।

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संयुक्त राष्ट्र की विशेष रिपोर्टर की कड़ी प्रतिक्रिया

अमेरिका के इस फैसले के तुरंत बाद संयुक्त राष्ट्र की विशेष रिपोर्टर Francesca Albanese ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अमेरिका पर खुला आरोप लगाया कि इस तरह के डेजिगनेशन का इस्तेमाल सरकार द्वारा अपने आलोचकों की आवाज़ को दबाने के लिए किया जा रहा है। आपको बता दें कि यह संगठन साल 2020 में बनाया गया था और तब से यह उन देशों और कंपनियों के खिलाफ लगातार अभियान चला रहा है जो इजराइल की नीतियों का समर्थन करते हैं। इस समूह ने विशेष रूप से उन रक्षा ठेकेदारों को निशाना बनाया है जिनके संबंध इजराइल से हैं, जिनमें Elbit Systems का नाम भी शामिल है।

ब्रिटेन और अमेरिका की रणनीतिक कार्रवाई

यह पूरा मामला अकेले अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पहले ब्रिटेन की सरकार ने भी 5 जुलाई 2025 को Terrorism Act 2000 के तहत इस संगठन को प्रतिबंधित कर दिया था। ब्रिटेन के उस कानून के तहत समूह की सदस्यता लेना और उसके लिए फंड जुटाना पूरी तरह से अपराध घोषित कर दिया गया था। फिलहाल ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट में इस घरेलू प्रतिबंध की वैधता को चुनौती देने वाली एक अपील पर सुनवाई होनी तय है। दूसरी ओर, अमेरिका की आतंकवाद विरोधी रणनीति में भी बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने जून 2026 में दुनिया के 60 से अधिक देशों के अधिकारियों को संबोधित करते हुए यह स्पष्ट किया था कि अमेरिका अब अपना ध्यान पूरी तरह से बदलकर तथाकथित 'far-left terror' यानी सुदूर-वामपंथी आतंकवाद की तरफ केंद्रित करने जा रहा है। मानवाधिकारों की वकालत और अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर कानूनी तनाव लगातार चर्चा में रहा है, जिसका शिकार खुद संयुक्त राष्ट्र की अधिकारी फ्रांसेस्का अल्बानीज़ भी हो चुकी हैं। जुलाई 2025 में अमेरिका ने उन पर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत की सहायता करने का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगा दिए थे, जिसकी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने कड़ी निंदा की थी। हालांकि, एक संघीय जज के अंतरिम आदेश के बाद, जिसमें यह पाया गया कि ये प्रतिबंध उनकी आवाज़ और वकालत को दंडित करने के लिए लगाए गए थे, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने मई 2026 में उनका नाम इस प्रतिबंधित सूची से हटा दिया था।

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