अमेरिका ने पैलेटाइन एक्शन को घोषित किया आतंकवादी संगठन, बैन के बाद भी संगठन ने जारी रखने को कहा अपना अभियान

अमेरिका की सरकार ने यूके आधारित डायरेक्ट एक्शन मूवमेंट Palestine Action को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने आधिकारिक तौर पर इस संगठन को Specially Designated Global Terrorist (SDGT) यानी वैश्विक आतंकवादी संगठन के रूप में नामित कर दिया है। यह कार्रवाई कार्यकारी आदेश 13224 के तहत की गई है, जिसके बाद से अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों के लिए इस समूह के साथ किसी भी तरह का बिजनेस करना पूरी तरह से अवैध हो गया है। इसके अलावा, संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर इस संगठन की जितनी भी संपत्ति या फंड मौजूद था, उसे पूरी तरह से फ्रीज कर दिया गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह संगठन साल 2020 में अपनी शुरुआत के बाद से ही आतंकवाद का समर्थन करता आ रहा है और इसने ब्रिटिश कानून प्रवर्तन एजेंसियों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ उन कमर्शियल कंपनियों को भी निशाना बनाया है जिनका संबंध इजराइल से है।
अमेरिकी अधिकारियों का बयान और प्रतिबंध की वजह
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने इस फैसले का बचाव किया है और कहा है कि प्रशासन उन समूहों के वित्तीय स्रोतों को पूरी तरह से काटना चाहता है जिन्हें वे चरमपंथी मानते हैं। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता Tommy Piggot ने इस संगठन को इटली के Autistici/Inventati और Masar Badil जैसे समूहों के साथ रखते हुए हिंसक चरमपंथी समूह करार दिया है। इस अमेरिकी फैसले का इजराइल सरकार ने औपचारिक रूप से स्वागत किया है, क्योंकि इजराइल लंबे समय से ऐसे संगठनों के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई की मांग करता रहा है। अमेरिका के इस कदम को वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और वैचारिक समूहों के खिलाफ कड़े आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
संगठन की सह-संस्थापक हुदा अम्मोरी का कड़ा रुख
अमेरिका द्वारा आतंकी संगठन घोषित किए जाने के बाद पैलेटाइन एक्शन की सह-संस्थापक Huda Ammori ने अलजवाफिर को दिए गए इंटरव्यू में साफ कर दिया है कि अमेरिकी प्रतिबंधों से उनके समर्थकों का हौसला कम नहीं होगा। उन्होंने कहा कि उनका संगठन इजरायली हथियार निर्माताओं, विशेष रूप से Elbit Systems के खिलाफ अपने अभियानों को बिल्कुल नहीं रोकेगा। फिलिस्तीनी और इराकी मूल की रहने वाली अम्मोरी ने अमेरिका के इस फैसले को पूरी तरह से पाखंडी बताया और दावा किया कि उनके संगठन का मुख्य उद्देश्य युद्ध की मशीनरी को बाधित करके लोगों की जान बचाना है। उन्होंने ब्रिटेन की सरकार से भी अपील की है कि वे साल 2025 में लगाए गए अपने प्रतिबंध पर फिर से विचार करें, जिस पर सुनवाई इस साल नवंबर में यूके सुप्रीम कोर्ट में होने वाली है।
मानवाधिकार विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया और वैश्विक चिंताएं
संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार विशेषज्ञ Francesca Albanese ने अमेरिका के इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि इस तरह के फैसलों का मुख्य मकसद कुछ चुनिंदा लोगों को निशाना बनाकर बाकी लोगों की आवाज को दबाना है। ट्रंप प्रशासन द्वारा उठाए गए इस कदम से यह साफ हो गया है कि अमेरिका उन सभी संगठनों पर आर्थिक शिकंजा कस रहा है जिन्हें वह राजनीतिक या वैचारिक रूप से अपने हितों के खिलाफ मानता है। इस पूरी स्थिति के बीच दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन और एक्टिविस्ट इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि आने वाले दिनों में ब्रिटेन की अदालत इस संगठन के भविष्य को लेकर क्या फैसला सुनाती है, क्योंकि इसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे आंदोलनों पर पड़ सकता है।